हरिद्वार की दिव्य धरा पर श्रीमद्भागवत महापुराण की पावन कथा का भव्य आयोजन श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति रस से सराबोर कर रहा है

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। भारत माता मंदिर के सामने मां गंगा के पावन तट पर भूपतवाला का आश्रम इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना के अद्भुत संगम का साक्षी बना हुआ है। विश्वविख्यात तीर्थ नगरी हरिद्वार की दिव्य धरा पर श्रीमद्भागवत महापुराण की पावन कथा का भव्य आयोजन श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति रस से सराबोर कर रहा ह। इस पुण्य अवसर का आयोजन श्री भगवान दास गौतम तथा उनकी धर्मपत्नी श्रीमती राजवती जी द्वारा अपने आत्मिक सुख, पारिवारिक मंगल और समस्त जनकल्याण की भावना से अत्यंत श्रद्धा एवं समर्पण के साथ कराया जा रहा है।जनपद हाथरस के सादाबाद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सेदरिया से पधारे श्री भगवान दास गौतम अपने लगभग 200 श्रद्धालु भक्तजनों के साथ इस दिव्य कथा अमृत का श्रवण करने हरिद्वार पहुंचे हैं। भारत माता मंदिर के सामने परमार्थ आश्रम घाट का सम्पूर्ण वातावरण इन दिनों “राधे-राधे”, “हरे कृष्ण” और “जय श्री हरि” के जयघोष से गुंजायमान हो रहा है। कथा स्थल को भव्य एवं मनोहारी ढंग से सजाया गया है, जहां पुष्पों की सुगंध, दीपों की आभा और भजनों की मधुर ध्वनि श्रद्धालुओं के मन को अलौकिक शांति प्रदान कर रही है।कथा व्यास परम पूज्य श्री लक्ष्मी नारायण विष्णु कुमार राधा आचार्य जी महाराज अपने श्रीमुख से श्रीमद्भागवत के दिव्य प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण, मधुर और हृदयस्पर्शी वर्णन कर रहे हैं। वे कथा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप, उनकी लीलाओं, भक्तों के प्रति करुणा, धर्म स्थापना और मोक्ष मार्ग के गूढ़ रहस्यों को सरल एवं सरस भाषा में प्रस्तुत कर रहे हैं। कथा के दौरान जब श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, व्रज की बाल लीलाएं, गोवर्धन धारण, रास लीला और भक्त प्रह्लाद, ध्रुव तथा सुदामा जैसे महान प्रसंगों का वर्णन होता है, तो उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति में डूब जाते हैं।कथा व्यास परम पूज्य स्वामी लक्ष्मी नारायण विष्णु कुमार राधाचार्य जी महाराजसमय-समय पर श्रीमद्भागवत के श्लोकों का उच्चारण करते हुए उनके गूढ़ अर्थ भी समझा रहे हैं। विशेष रूप से यह श्लोक भक्तों के हृदय को गहराई से स्पर्श कर रहा है—

“स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे। अहैतुकी अप्रतिहता ययाऽत्मा सुप्रसीदति॥”

अर्थात मनुष्य का सर्वोत्तम धर्म वही है, जिससे भगवान के प्रति निष्काम और निरंतर भक्ति उत्पन्न हो, क्योंकि उसी से आत्मा को वास्तविक शांति और प्रसन्नता प्राप्त होती है।कथा के प्रत्येक दिवस में भक्तजन बड़े प्रेम और श्रद्धा के साथ कथा श्रवण कर अपने जीवन को धन्य मान रहे हैं। महिलाओं द्वारा मंगल गीत, पुरुषों द्वारा हरिनाम संकीर्तन और बच्चों की उत्साहपूर्ण सहभागिता इस आयोजन को और भी दिव्य बना रही है। ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं श्रीहरि की कृपा इस स्थल पर बरस रही होआयोजक श्री भगवान दास गौतम जी ने बताया कि इस पावन कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परिवार और समाज में आध्यात्मिक चेतना का संचार करना है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार जैसी पुण्यभूमि पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन उनके लिए जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती राजवती जी तथा समस्त परिवारजन सेवा, सत्कार और आयोजन व्यवस्था में पूर्ण समर्पण भाव से जुटे हुए हैं।

विश्व प्रसिद्ध पावन नगरी हरिद्वार की दिव्य वायु, गंगा जी की पावन धारा और संत-महात्माओं के सान्निध्य में यह कथा आयोजन श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया है। भक्तजन मानते हैं कि श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, धर्म, प्रेम और भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करने वाला दिव्य प्रकाश है इस अवसर पर श्री शिव कुमार बृजमोहन पंडित श्री योगीराज शर्मा के साथ-साथ पुत्रीश्रीमती रेवती भी कथा श्रवण हेतु हरिद्वार पधारी तथा दिव्या भाव कथा का श्रवण कर अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया

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