अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। खड़खड़ी की पुण्यभूमि, बसंत गली स्थित श्री विशुद्धानन्द आश्रम में ब्रह्मलीन गोलोकवासी स्वामी श्री धर्मदेव जी महाराज की पावन स्मृति में आयोजित मूर्ति स्थापना महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और संत-सान्निध्य के दिव्य वातावरण में संपन्न हुआ। यह अलौकिक आयोजन आश्रम के श्री महंत, पीठाधीश्वर, परम श्रद्धेय एवं प्रातः स्मरणीय स्वामी श्री रामानंद जी महाराज के पतित-पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ, जहाँ देश के विभिन्न स्थानों से पधारे संत-महापुरुषों के श्रीमुख से ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की अमृतमयी सरिता प्रवाहित होती रही। सम्पूर्ण आश्रम परिसर भजन, कीर्तन, वैदिक मंत्रोच्चार और संतवाणी से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने इस आयोजन को और अधिक गरिमामय बना दिया। ब्रह्मलीन स्वामी श्री धर्मदेव जी महाराज की दिव्य प्रतिमा की स्थापना के समय उपस्थित भक्तों की आँखें श्रद्धा और भावनाओं से नम हो उठीं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं गुरुदेव अपनी दिव्य कृपा से इस पुण्य आयोजन को आशीर्वाद प्रदान कर रहे हों।इस अवसर पर श्री महंत परम श्रद्धेय, प्रातः स्मरणीय स्वामी रामानंद जी महाराज ने अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में ब्रह्मलीन स्वामी श्री धर्मदेव जी महाराज को स्मरण करते हुए कहा कि गुरु का स्वरूप कभी नश्वर नहीं होता। शरीर भले ही पंचतत्व में विलीन हो जाए, किन्तु गुरु की वाणी, उनके संस्कार, उनकी तपस्या और उनके द्वारा प्रदत्त आध्यात्मिक प्रकाश सदैव जीवित रहता है। उन्होंने कहा कि मूर्ति स्थापना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि गुरु के आदर्शों, उनकी साधना और उनके दिव्य जीवन को भावी पीढ़ियों तक पहुँचाने का पावन संकल्प है। स्वामी रामानंद जी महाराज ने अपने श्रीमुख से कहा, “संत महापुरुष इस धरती पर ईश्वर की करुणा के प्रत्यक्ष स्वरूप होते हैं। वे स्वयं तप की अग्नि में तपकर समाज को शीतलता प्रदान करते हैं। उनका जीवन त्याग, सेवा और प्रेम का संदेश देता है। जो मनुष्य संतों की वाणी को अपने जीवन में उतार लेता है, उसका जीवन स्वतः ही सफल और सार्थक हो जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी धर्मदेव जी महाराज का सम्पूर्ण जीवन लोककल्याण, धर्म रक्षा और अध्यात्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। उनकी स्मृति में स्थापित यह प्रतिमा श्रद्धालुओं को सदैव धर्म मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी।संत समागम के मध्य विभिन्न संत-महापुरुषों ने भी अपने दिव्य विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संत समाज इस धरती पर ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में मानव जीवन को दिशा प्रदान करता है। संतों का सान्निध्य मनुष्य के भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप प्रज्वलित करता है।समारोह के अंत में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर स्वयं को धन्य अनुभव किया। हरिद्वार की पावन वायु में संतवाणी और गुरु स्मृति का यह महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया। इस अवसर पर महंत स्वामी योगेंद्रानन्द शास्त्री महाराज महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज महंत दिनेश दास महाराज महंत प्रेमानंद महाराज साध्वी तृप्ता महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे अनेकों आश्रम मठ मंदिर से आये संत महापुरुषों ने भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया तथा कार्यकर्म में भाग लिया।
