मनुष्य का मन किसी मंदिर से कम नहीं होता : महंत प्रहलाद दास

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। रानी गली पीपल वाली गली स्थित श्री गुरु कृपा कुटी में भक्तजनों के बीच ज्ञान की अमृत वर्षा करते हुए श्री महंत प्रहलाद दास महाराज ने कहामनुष्य का मन किसी मंदिर से कम नहीं होता, क्योंकि यही वह पवित्र स्थान है जहाँ अच्छे और बुरे विचारों का जन्म होता है। यदि मन शुद्ध, शांत और सकारात्मक हो, तो जीवन अपने आप सही दिशा में आगे बढ़ता है। मन ही वह शक्ति है जो हमें सही और गलत की पहचान कराता है। जब मन में सद्भाव, प्रेम और आस्था का निवास होता है, तब व्यक्ति का जीवन सुख, शांति और संतोष से भर जाता है। इस प्रकार मन का पवित्र होना किसी मंदिर की पवित्रता से कम नहीं है।जिस व्यक्ति के मन में भगवान राम की भक्ति बस जाती है, उसका जीवन अपने आप प्रकाशमय हो जाता है। भगवान राम मर्यादा, सत्य, त्याग और धर्म के प्रतीक हैं। उनकी भक्ति करने वाला व्यक्ति इन गुणों को अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करता है। राम नाम का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है, भय दूर होता है और जीवन की कठिनाइयों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। राम भक्ति मनुष्य को सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाती है। श्री महंत प्रहलाद दास महाराज ने कहा

भगवान राम का नाम केवल एक नाम नहीं, बल्कि जीवन को पार लगाने वाली एक पवित्र नाव के समान है। जैसे नाव हमें नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे तक सुरक्षित पहुँचाती है, वैसे ही राम नाम मनुष्य को इस संसार रूपी भवसागर से पार लगाने में सहायक होता है। राम नाम का स्मरण करने से मन को स्थिरता, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति मिलती है। यह मनुष्य को दुख, चिंता और भय से मुक्त करके उसे सच्चे सुख और शांति की ओर ले जाता है।

अतः यह कहा जा सकता है कि मनुष्य का मन एक मंदिर के समान है और भगवान राम की भक्ति उस मंदिर की आराधना है। जब मन में राम का नाम बस जाता है, तब जीवन में अंधकार का स्थान प्रकाश ले लेता है और मनुष्य का कल्याण निश्चित हो जाता है। राम भक्ति ही वह मार्ग है जो मनुष्य को सच्चे सुख, शांति और मोक्ष की ओर ले जाता है।

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