संत महापुरुषों के पावन कल्याणकारी वचन मनुष्य के जीवन का उद्धार कर देते है : स्वामी राघवानन्द गिरी

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। हरिपुरकलां की पावन धरा पर स्थित राघव शक्ति धाम गंगा सूरजपुर कॉलोनी हरिपुर जिला देहरादून हरिद्वार में जगत कल्याण की भावना से निहित होकर आध्यात्मिक चेतना के प्रसार हेतु आयोजित यह विशाल संत समागम और भंडारा भक्ति और श्रद्धा का एक अनुपम उदाहरण बनकर उभरा। आश्रम के परमा ध्यक्ष 1008 श्री स्वामी राघवानन्द गिरी महाराज के दिव्य सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल स्थानीय श्रद्धालुओं ने भारी संख्या में शिरकत की, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आए विरक्त संतों और महापुरुषों की उपस्थिति ने संपूर्ण वातावरण को अलौकिक ऊर्जा से भर दिया। इस भव्य आयोजन का मुख्य आकर्षण पूज्य गुरुदेव श्री 1008 स्वामी राघवानंद गिरी महाराज का वह संबोधन रहा, जिसने उपस्थित जनसमूह के भीतर धर्म और संस्कृति के प्रति एक नई अलख जगा दी।महाराज जी ने अपने ओजस्वी प्रवचनों में इस बात को रेखांकित किया कि आधुनिकता की अंधी दौड़ में फंसा मनुष्य अक्सर अपने मूल संस्कारों और जीवन के वास्तविक लक्ष्य को भूल जाता है। उन्होंने अत्यंत गंभीरता के साथ यह स्पष्ट किया कि इस पृथ्वीलोक पर मानव कल्याण का एकमात्र और अचूक मार्ग धर्म, श्रेष्ठ कर्म और सतगुरु के पावन वचनों का अनुसरण करना ही है। स्वामी जी के अनुसार, धर्म हमें मर्यादाओं में रहना सिखाता है, जबकि निष्काम कर्म हमारे अंतःकरण की शुद्धि करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण तत्व उन्होंने ‘सतगुरु के वचनों’ को बताया, क्योंकि गुरु की वाणी ही वह दिव्य प्रकाश है जो मोह-माया के घने अंधकार को चीरकर आत्मा को परमात्मा से मिलन का मार्ग दिखाती है।स्वामी जी ने आगे विस्तार से समझाते हुए कहा कि जो मनुष्य अपने जीवन में गुरु के वचनों को आत्मसात कर लेता है और धर्मसम्मत आचरण करता है, उसके जीवन की दिशा ही बदल जाती है। ऐसे मनुष्य का न केवल यह वर्तमान जीवन (इहलोक) सुख, शांति और संतोष से परिपूर्ण होकर सार्थक होता है, बल्कि उसकी आत्मा मृत्यु के पश्चात भी सद्गति को प्राप्त होती है, जिससे उसका परलोक भी सुधर जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि गुरु की शरण में आने के बाद व्यक्ति के संचित पापों का नाश होता है और वह निष्पाप होकर समाज के कल्याण में अपना योगदान देने लगता है। इस विशाल भंडारे के माध्यम से सैकड़ो लोगों तथा संत महापुरुषों ने प्रसाद ग्रहण कर सेवा भाव का अनुभव किया, वहीं स्वामी जी के अमृत वचनों ने भक्तों के हृदय में भक्ति का अटूट विश्वास भर दिया। यह पूरा समागम अध्यात्म, सेवा और गुरु-भक्ति का एक ऐसा अनूठा संगम रहा, जिसकी चर्चा अब चारों ओर हो रही है। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी चिद्ध विलासानंद महाराज महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज महंत मस्त गिरी महाराज महंत कन्हैया दास महाराज महंत सीताराम दास महाराज महंत हरिदास महाराज महंत रवि देव महाराज महंत सूरज दास महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज कोतवाल श्याम गिरी महाराज कोतवाल देहरादून बाबा रमेशानंद सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे।

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