महान संत परमहंस श्री रामकृष्ण जी एवं राष्ट्रऋषि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन से विनम्र श्रद्धांजलि

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

ऋषिकेश। महान संत, युगद्रष्टा एवं आध्यात्मिक चेतना के प्रकाशपुंज परमहंस श्री रामकृष्ण जी तथा भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री, प्रखर राष्ट्रवादी, संवेदनशील कवि एवं राष्ट्रऋषि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर परमार्थ निकेतन की ओर से दोनों महान विभूतियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों महान व्यक्तित्वों का जीवन अपने-अपने क्षेत्र में भारत की सनातन चेतना, मानवता, राष्ट्रप्रेम और उच्च आदर्शों का अनुपम प्रकाशस्तंभ रहा। परमहंस श्री रामकृष्ण जी ने आत्मसाक्षात्कार, प्रेम, भक्ति, करुणा और सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया, वहीं श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने राष्ट्रसेवा, लोकतांत्रिक मर्यादा, सुशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रीय स्वाभिमान को अपने जीवन का ध्येय बनाया। परमहंस श्री रामकृष्ण जी का जीवन इस महान सत्य की अनुभूति कराता है कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, आत्मबोध और समस्त मानवता में परमात्मा के दर्शन की दिव्य यात्रा है। उन्होंने अपने जीवन और साधना से यह संदेश दिया कि सत्य एक है, उसे प्राप्त करने के मार्ग अनेक हो सकते हैं। उनका सर्वधर्म समभाव आज भी विश्व को शांति, सद्भाव और एकात्मता का मार्ग दिखाता है। वहीं, श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का जीवन आधुनिक भारत की राष्ट्रचेतना का सशक्त अध्याय है। उन्होंने राजनीति को सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम माना। उनके व्यक्तित्व में विचारों की दृढ़ता के साथ हृदय की कोमलता, राष्ट्रभक्ति के साथ मानवीय संवेदना और नेतृत्व के साथ लोकतांत्रिक मर्यादा का अद्भुत समन्वय दिखाई देता था। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रचेतना के अद्भुत समन्वय में निहित है। परमहंस श्री रामकृष्ण जी ने भारत की आध्यात्मिक आत्मा को जागृत किया और अटल जी ने भारत के राष्ट्रीय स्वाभिमान को सशक्त स्वर दिया। दोनों का जीवन हमें अपने भीतर जागरण और बाहर सेवा, दोनों का संदेश देता है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि परमहंस श्री रामकृष्ण जी का संदेश था, अपने भीतर के परमात्मा को पहचानो और हर जीव में उसी दिव्यता का दर्शन करो; अटल जी का जीवन संदेश था, राष्ट्र को सर्वाेपरि रखो और भारत की गरिमा के लिए समर्पित रहो। आज की पीढ़ी के लिए इन दोनों महापुरुषों का जीवन आध्यात्मिक जागरण, सेवा, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण का महान मार्गदर्शन है। श्री अटल जी की वाणी में राष्ट्र का स्वाभिमान था और हृदय में भारत की आत्मा। उनकी कविताओं में संघर्ष के बीच आशा, निराशा के बीच संकल्प और अंधकार के बीच प्रकाश की खोज दिखाई देती है। परमहंस श्री रामकृष्ण जी की आध्यात्मिक दृष्टि और श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की राष्ट्रदृष्टि हमें एक ही व्यापक संदेश देती है, अपने भीतर दिव्यता जगाइए और अपने कर्मों से राष्ट्र एवं मानवता की सेवा कीजिए।

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