अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। सिटी यूनियन बैंक की गौरवशाली और ऐतिहासिक यात्रा का शाखा ओपनिं के रूप में आरंभ आज से एक शताब्दी पूर्व 31 अक्टूबर 1904 को तमिलनाडु के कुंभकोणम नामक पावन नगर में हुआ था जिसे उस समय कुंभकोणम बैंक लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। एक छोटे से क्षेत्रीय संस्थान के रूप में शुरू हुए इस बैंक का मूल उद्देश्य स्थानीय व्यापारियों, किसानों और आम नागरिकों को ईमानदारी व पारदर्शिता के साथ वित्तीय संबल प्रदान करना था और अपनी इसी निष्ठा के दम पर यह संस्थान धीरे-धीरे वटवृक्ष की तरह पूरे भारत में फैल गया जिसे आज हम सिटी यूनियन बैंक के नाम से पहचानते हैं। आज का दिन तीर्थनगरी हरिद्वार के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ रहा है क्योंकि शहर के हृदय स्थल और प्रमुख व्यापारिक केंद्र देवपुरा में बैंक की इस प्रतिष्ठित नई शाखा का भव्य और मंगलमय शुभारंभ हुआ है।

गंगा की अविरल लहरों की कलकल और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच खुली यह शाखा न केवल आधुनिक बैंकिंग तकनीकों का एक संगम है बल्कि यह दक्षिण भारतीय बैंकिंग परंपरा के अटूट भरोसे और उत्तर भारत की पावन ऊर्जा को एक सूत्र में पिरोने का कार्य कर रही है। देवपुरा स्थित इस नई ब्रांच में ग्राहकों को अत्याधुनिक डिजिटल सेवाओं के साथ-साथ उस व्यक्तिगत जुड़ाव और आतिथ्य का भी अनुभव होगा जिसके लिए सिटी यूनियन बैंक पूरे देश में विख्यात है। यहाँ के स्थानीय व्यापारियों, निवासियों और दूर-दराज से आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए यह बैंक अब एक ऐसे सुदृढ़ स्तंभ के रूप में खड़ा है जो उनके बचत, ऋण और निवेश के सपनों को सुरक्षा के साथ नई उड़ान देने के लिए प्रतिबद्ध है। कुंभकोणम की पुण्य भूमि से शुरू हुआ यह सफर आज देवभूमि हरिद्वार की पवित्र धरती तक पहुँचकर अपनी सफलता और अटूट विश्वास की एक नई गाथा लिख रहा है जो निश्चित रूप से क्षेत्र की आर्थिक प्रगति और व्यावसायिक विकास में एक मील का पत्थर साबित होगी। इस नई शाखा का आगमन देवपुरा की व्यावसायिक गतिविधियों में नई चेतना का संचार करेगा और आधुनिक बैंकिंग के माध्यम से आम जनजीवन को और अधिक सुगम व समृद्ध बनाएगा जिससे आने वाले समय में यहाँ की आर्थिक स्थिति को एक नई दिशा और मजबूती प्राप्त होगी।
