शिव महापुराण कथा के श्रवण से सभी पाप, विकार और अज्ञानता नष्ट हो जाते है : स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार जस्साराम रोड़ स्थित श्री जगद्गुरू उदासीन आश्रम के 55 वें वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही श्री शिव महापुराण कथा के छठे दिन श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी सुतिक्ष्ण मुन ने कहा कि शिव महापुराण कथा के श्रवण से सभी पाप, विकार और अज्ञानता नष्ट हो जाते है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति से मनुष्य को भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। जिससे वह श्रेष्ठतम स्थिति को प्राप्त करता है। कथाव्यास पंडित लक्ष्मी नारायण शास्त्री ने श्रद्धालु भक्तों को माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या की। इस दौरान उन्होंने अन्न-जल का त्याग कर दिया। उनकी इस भक्ति की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव स्वयं एक बटुक ब्रह्मचारी के रूप में उनके आश्रम पहुंचे और शिवजी की ही निंदा करने लगे। माता पार्वती ने क्रोधित होकर ब्रह्मचारी को वहां से जाने को कहा और अपने संकल्प पर अडिग रहीं। माता पार्वती के अटल प्रेम और सच्ची भक्ति को देखकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग प्रेरणा देता है कि यदि मन में अटूट विश्वास, निष्काम भक्ति और सच्चा प्रेम हो, तो ईश्वर को भी प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, स्वामी ज्योर्तिमयानंद, साध्वी नाराण गिरी, भावना सखेड़ी, महेन्द्र सेठी सहित कई संत महंत मौजूद रहे।

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