भारत और नेपाल एक मैत्री संबंध ही नहीं सनातन का संयुक्त प्रवाह है तथा देवों की जननी धरती है : बाल विदुषी देवी भवानी

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार । श्री प्रेम नगर आश्रम मे चल रही श्रीमद् भागवत कथा में दूसरे दिन अपने श्री मुख से ज्ञान की अमृत वर्षा करते हुए कथा व्यास परम विदुषी भागवत आचार्य बाल विदुषी देवी भवानी ने कहा चलती चक्की देखकर देख कबीरा रोये दो पाटन के बीच में जिंदा रहे ना कोई श्रीमद् भागवत एक पुण्यदाई पावन कथा है इसके श्रवण करने से हमारा मानव जीवन धन्य तथा सार्थक हो जाता हैश्रीमद्भागवत पुराण भारतीय संस्कृति और धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि जीवन के आदर्शों और नैतिक मूल्यों के लिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पुराण मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके दिव्य लीलाओं और भक्तों के प्रति उनके प्रेम का विस्तृत वर्णन करता है। श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक कथा नहीं है, बल्कि इसमें जीवन जीने के मार्गदर्शन, धर्म के महत्व, और मोक्ष की प्राप्ति के उपाय भी निहित हैं।इस कथा का सबसे बड़ा महत्त्व यह है कि यह समस्त जीवों के लिए पुण्य फल प्रदान करती है। जो व्यक्ति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण के साथ इसे सुनता या पढ़ता है, उसे मानसिक शांति, आत्मिक विकास और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। यह कथा जीवन में आने वाली कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करने की शक्ति प्रदान करती है और मनुष्य के भीतर दया, सहानुभूति, और प्रेम जैसे गुणों का विकास करती है।श्रीमद्भागवत कथा सुनने या पढ़ने से व्यक्ति का जीवन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी समृद्ध होता है। यह हमें बताती है कि किस प्रकार भक्ति, कर्म और ज्ञान का समन्वय करके जीवन को पूर्णता की ओर अग्रसर किया जा सकता है। इसके अलावा, कथा में प्रस्तुत पात्रों की लीलाओं और संघर्षों से हम अपने जीवन की परेशानियों में धैर्य और संतुलन बनाए रखना सीखते हैं।अतः श्रीमद्भागवत कथा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह समग्र मानव जीवन के कल्याण और समाज में नैतिकता, प्रेम और करुणा का संचार करने वाला अद्भुत मार्गदर्शन है। इसे सुनने और उसका अनुसरण करने से व्यक्ति का मनोबल बढ़ता है, जीवन का उद्देश्य स्पष्ट होता है और अंततः आत्मा को मोक्ष और आनंद की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि श्रीमद्भागवत कथा संपूर्ण विश्व में लोक कल्याण और जीवन कल्याण की अमूल्य धारा बनकर प्रवाहित होती है।

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