महामंडलेश्वर स्वामी रामकुमार दास जी महाराज की पावन स्मृति में एक विशाल संत समागम

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। आश्रम के श्री महंत परम पूज्य प्रातः स्मरणीय गंगेश्वरानंन्द जी महाराज के पावन सानिध्य में बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ इस अवसर पर बोलते हुए परम तपस्वी ज्ञान मूर्ति प्रातः स्मरणीय श्री गंगेश्वरानंन्द जी महाराज ने कहाभारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान अत्यंत ऊँचा माना गया है। कहा गया है—

“गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णुः, गुरु देवो महेश्वरः।”

यानि गुरु ही सृष्टिकर्ता हैं, पालनकर्ता हैं और संहारकर्ता भी; वे अज्ञान का अंत कर के ज्ञान का प्रकाश देते हैं। गुरु केवल शिक्षक नहीं, बल्कि एक ऐसा मार्गदर्शक होते हैं जो जीवन को सही दिशा, सही दृष्टि और सही उद्देश्य प्रदान करते हैं।

गुरु का महत्व

गुरु जीवन का वह प्रकाशस्तंभ है जिसके सहारे शिष्य अंधकार से निकलकर उजाले की ओर बढ़ता है। माता-पिता शरीर देते हैं, पर गुरु “जीवन जीने की कला” सिखाते हैं। गुरु व्यक्ति के अंदर की प्रतिभा को पहचानकर उसे संवारते हैं। वे शिष्य को सच्चाई, धैर्य, मेहनत, अनुशासन और मानवता का महत्व समझाते हैं।

गुरु और शिष्य का पवित्र संबंध

गुरु-शिष्य परंपरा भारत की प्राचीन धरोहर है। यह केवल ज्ञान का लेन-देन नहीं, बल्कि आत्मिक जुड़ाव का पवित्र बंधन है। जब शिष्य अपने गुरु पर पूर्ण विश्वास करता है, तब गुरु की हर बात उसके जीवन में बीज की तरह बोई जाती है, जो समय के साथ फलदार वृक्ष बन जाती है।

शिष्य की विनम्रता और गुरु का स्नेह मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं जहाँ सीखना सहज और आनंदमय हो जाता है। यही कारण है कि भारत में गुरु को ईश्वर का रूप माना गया है।

गुरु ज्ञान देता है, परिपक्वता भी सिखाता है इस अवसर पर बोलते हुए हनुमान गुफा के महंत महामंडलेश्वर 1008 प्रातः स्मरणीय श्री श्री श्याम दास जी महाराज ने कहा

ज्ञान केवल किताबों से नहीं मिलता। जीवन में आने वाली समस्याएँ, गलतियाँ, संघर्ष और अनुभव — इन सबमें गुरु शिष्य को सही राह दिखाते हैं।

गुरु सिखाते हैं कि—

सफलता प्रयासों से मिलती है

मन की शांति का रास्ता आत्म-अनुशासन में है

असफलताएँ जीवन का हिस्सा हैं

निरीक्षण और चिंतन से समझ बढ़ती है सतगुरु इस पृथ्वी लोक पर ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में हमारे मार्गदर्शन हेतु अवतरित होते हैं

गुरु केवल हमें भक्ति मार्ग ही नहीं दिखाई हमारा मार्गदर्शन करते हुए उंगली पड़कर हमें भवसागर पार कराते हैं बल्कि जीवन के हर पहलू को समझना सिखाते हैं।

गुरु का आशीर्वाद – जीवन की असली पूँजी

गुरु का आशीर्वाद मनुष्य को मानसिक शक्ति देता है। जब गुरु प्रसन्न होते हैं तो शिष्य को आत्मविश्वास, संकल्प और निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा हो जाए, उसका जीवन ऊँचाइयों को छूने लगता है। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन हों, गुरु के शब्द शिष्य को हमेशा सहारा देते हैं। इस अवसर पर बोलते हुए महंत राजकुमार दास महाराज ने कहा

गुरु पूर्णता का मार्ग है

अज्ञान से ज्ञान तक, भ्रम से स्पष्टता तक, भटकाव से स्थिरता तक—

गुरु शिष्य को धीरे-धीरे परिपक्व बनाते हैं।

वह अपने जीवन की जिम्मेदारियों को समझता है, अपने लक्ष्यों को पहचानता है और सही दिशा में आगे बढ़ता है।

गुरु शिष्य के जीवन को केवल बदलते ही नहीं, बल्कि उसे अर्थवान, सुंदर और उपयोगी बनाते हैं।

“गुरु महिमा” केवल शब्दों में नहीं बाँधी जा सकती। गुरु वह दीपक है जो स्वयं जलकर भी दूसरों का मार्ग रोशन करता है। उनका ज्ञान अमूल्य है, उनकी शिक्षा जीवनभर साथ रहती है। इसलिए कहा जाता है—

“गुरु के बिना ज्ञान नहीं, और ज्ञान के बिना जीवन नहीं।”

गुरु को सम्मान देना, उनकी वाणी को समझना और अपने जीवन में उतारना ही शिष्य की सच्ची श्रद्धांजलि है। इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत कमलेश्वरानंद महाराज ने कहा

गुरु हमारे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा, शक्ति और मार्गदर्शक होते हैं। इस अवसर पर महामंडलेश्वर रामदास महाराज महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज श्री महंत सूरज दास महाराज श्री महंत रघुवीर दास महाराज महंत प्रेमदास महाराज महंत हरिदास महाराज स्वामी हरिदास महाराज बाबा हठयोगी महाराज महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज महामंडलेश्वर अनंतानंद महाराज महंत राजेंद्र दास महाराज महंत किशन दास महाराज महंत भूपेंद्र गिरी महाराज स्वामी गणेशानंद महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!