श्री 1008 महंतबाबा भगवान गिरी महाराज की 40वीं पावनपुण्यतिथि आश्रम के महंत भूपेंद्र गिरी के पतित पावन सानिध्य में मनायी गयी

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। ऋषिकेश स्थित सिद्धपीठ श्री श्री 1008 बाबा भगवान गिरी आश्रम, पंजाब वाले आश्रम में प्रतः स्मरणीय साक्षात् परमात्मा स्वरूप श्री महंत भगवान गिरी जी महाराज की 40वीं पावन पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ भव्य रूप से संपन्न हुई। यह दिव्य आयोजन आश्रम के पूज्य महंत प्रतः स्मरणीय ज्ञानमूर्ति श्री भूपेंद्र गिरी जी महाराज के पतित-पावन सान्निध्य में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रातः काल से ही आश्रम परिसर में श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और भक्तजनों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। संपूर्ण वातावरण वेद मंत्रों, भजन-कीर्तन, गुरु वंदना और संतों के दिव्य प्रवचनों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में पुष्पांजलि अर्पित कर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि समर्पित की तथा आश्रम में आयोजित भंडारे और सत्संग में बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई।स पावन अवसर पर संत महापुरुषों ने गुरु महिमा और सनातन परंपरा की गरिमा पर अपने दिव्य विचार प्रकट किए। पूज्य श्री महंत दुर्गादास महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरुजनों की पावन स्मृतियां केवल हमारे हृदय को श्रद्धा से भरती ही नहीं, बल्कि हमारे भाग्य का उदय भी करती हैं। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा से ही मनुष्य को ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने का अवसर प्राप्त होता है और वही उसे दान, धर्म तथा सत्कर्म के पवित्र मार्ग पर अग्रसर करती है। उनके अनुसार गुरु का स्मरण मनुष्य जीवन को पवित्र और सफल बना देता है।

 

इस अवसर पर बोलते हुए महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद महाराज ने कहा कि जिन भक्तों को गुरु के पावन चरणों की शरण प्राप्त हो जाती है, उनके जन्म-जन्मांतरों के पुण्यों का उदय हो जाता है। उन्होंने कहा कि गुरु केवल सांसारिक जीवन के मार्गदर्शक नहीं, बल्कि आत्मा को परम सत्य से जोड़ने वाले दिव्य सेतु हैं। गुरु कृपा से ही मनुष्य का अंतःकरण निर्मल होता है और उसके जीवन में धर्म, शांति तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

 

पूज्य महंत मोहन सिंह महाराज ने अपने वचनों में कहा कि संतों के पावन दर्शन मात्र से ही मनुष्य के भाग्य का उदय हो जाता है। उन्होंने कहा कि संत महापुरुष इस धरती पर ईश्वर की जीवंत अभिव्यक्ति हैं, जिनके दर्शन और आशीर्वाद से मनुष्य के जीवन के कष्ट, अज्ञान और दुःख दूर हो जाते हैं। संतों की संगति मनुष्य को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है और उसके जीवन को सार्थक बनाती है।

 

आश्रम के पूज्य श्री महंत प्रतः स्मरणीय ज्ञानमणि श्री भूपेंद्र गिरी जी महाराज ने अपने दिव्य प्रवचन में कहा कि मनुष्य के अनेक जन्मों के पुण्यों के उदय होने पर ही उसे गुरु की शरण प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि गुरु ही इस पृथ्वी लोक पर हमारे सच्चे पथप्रदर्शक के रूप में अवतरित होकर हमारे जीवन को प्रकाशमान करते हैं। गुरुजनों के श्रीमुख से निकले पावन वचन मानव जीवन का उद्धार करते हैं और उसे धर्म, भक्ति तथा आत्मकल्याण के मार्ग पर स्थापित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संत महापुरुषों के दर्शन किसी तीर्थ से कम नहीं होते, क्योंकि जहां संतों का सान्निध्य होता है, वहीं ईश्वर का वास होता है।

 

समारोह के दौरान भजन-कीर्तन, हवन-पूजन, गुरु वंदना और विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। आश्रम परिसर श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण दिखाई दिया। यह पावन पुण्यतिथि समारोह गुरु परंपरा, संत महिमा और सनातन संस्कृति की गौरवशाली विरासत का अनुपम उदाहरण बनकर सभी श्रद्धालुओं के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया। श्रद्धालुओं ने इस अवसर को अपने जीवन का परम सौभाग्य बताते हुए गुरु चरणों में अपनी श्रद्धा समर्पित की। इस अवसर पर महंत तीरथ सिंह महाराज महंत मोहन सिंह महाराज महंत शुभम गिरी महाराज महंत केशवानंद महाराज महंत दुर्गादास महाराज महंत प्रहलाद दास महाराज श्री महंत बलवंत सिंह महाराज महंत रवि पुरी महाराज हरप्रीत श्री मनोहर लाल जगमोहन हरभजन किंदर सिंह सोनू यतिन हिमांशुसहित भारी संख्या में संत महंत तथा भक्तगण उपस्थित थे।

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