अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध श्री गोकुलधाम आश्रम में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री महंत लक्ष्मण दास जी महाराज की पावन स्मृति में गुरु भगवान प्रातः स्मरणीय श्री महंत परमेश्वर दास जी महाराज के पावन सानिध्य में विशाल संत भंडारे का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर हरिद्वार के विभिन्न मठों, मंदिरों एवं आश्रमों से पधारे संत-महात्माओं ने श्रद्धापूर्वक भोजन प्रसाद ग्रहण कर गुरु महाराज को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उपस्थित संतों ने गुरु परंपरा की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि गुरु का जीवन केवल अपने लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज के आध्यात्मिक उत्थान के लिए समर्पित होता है। संत भंडारे में श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में सहभागिता कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

प्रातः स्मरणीय परम पूज्य श्री महंत परमेश्वर दास जी महाराज ने अपने पावन उद्बोधन में कहा, “गुरु वह दिव्य शक्ति हैं जो अज्ञान के अंधकार को समाप्त कर आत्मा को परमात्मा के प्रकाश से जोड़ देते हैं। गुरु के चरणों में समर्पण करने वाला साधक जीवन के प्रत्येक संकट को सहजता से पार कर लेता है। गुरु की कृपा ही भक्ति, ज्ञान और मोक्ष का सर्वोत्तम मार्ग प्रशस्त करती है।”श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े के महंत रघुवीर दास जी महाराज ने कहा, “गुरु का स्मरण ही साधक के जीवन की सबसे बड़ी साधना है। गुरु का आशीर्वाद प्राप्त होने पर असंभव कार्य भी सहज हो जाते हैं और जीवन में आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होती है।”महंत सूरज दास जी महाराज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “गुरु सेवा से बढ़कर कोई तप नहीं और गुरु भक्ति से बढ़कर कोई साधना नहीं। महंत गणेश दास जी महाराज ने कहा, “संतों का सानिध्य और गुरु की वाणी मनुष्य के जीवन को पवित्र एवं संस्कारित बनाती है। गुरु के आदर्शों का अनुसरण ही सच्ची श्रद्धांजलि है और यही मानव जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।”कार्यक्रम का समापन संतों के आशीर्वचनों, सामूहिक प्रार्थना एवं प्रसाद वितरण के साथ भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने गुरु महाराज की पावन स्मृति को नमन करते हुए उनके बताए धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। इस अवसर पर महंत हरेंद्र दास महाराज महंत परमेश्वर दास महाराज महंत रघुवीर दास महाराज, महत गणेश दास महाराज, महंत महावीर दास, महंत सूरज दास महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष उपस्थित थे।
