भारतीय किसान यूनियन नैन ने किसानों की समस्याओं को लेकर भरी हुंकार

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। अलकनंदा घाट पर भारतीय किसान यूनियन (नैन) द्वारा आयोजित किसान अधिवेशन में किसानों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रदेश, तथा देशके विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर एकजुटता का परिचय दिया। अधिवेशन में किसानों के हितों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीरता से चर्चा की गई तथा सरकार से शीघ्र समाधान की मांग उठाई गई। अधिवेशन को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन (नैन) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जोगेंद्र नैन ने कहा कि देश का किसान आज भी अनेक समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने सरकार की कृषि बीज नीति को किसानों के हित में अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने की मांग करते हुए कहा कि गुणवत्तायुक्त बीज किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

उन्होंने गन्ना किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि चीनी मिलों द्वारा गन्ना मूल्य का भुगतान निर्धारित समय सीमा के भीतर किया जाना अनिवार्य बनाया जाए। यदि किसी मिल द्वारा भुगतान में अनावश्यक विलंब किया जाता है तो उस पर आर्थिक दंड लगाने के साथ-साथ कठोर प्रशासनिक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने गन्ने के ढुलाई भाड़े की समुचित व्यवस्था तथा गन्ने की पिलाई के लिए श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जोगेंद्र नैन ने कहा कि आगामी गन्ना बुवाई सत्र से पूर्व गन्ने का मूल्य तथा एफ.आर.पी. (फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइस) घोषित किया जाना चाहिए, जिससे किसान अपनी खेती की योजना समय रहते बना सकें। उन्होंने किसानों को पर्याप्त मात्रा में निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने तथा कृषि उपयोग के लिए बिजली दरों में राहत देने की भी मांग की। साथ ही कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले आवश्यक संसाधनों को अनुदान अथवा रियायती दरों पर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। अधिवेशन में उपस्थित किसानों ने भी अपनी विभिन्न समस्याओं को मंच के माध्यम से रखा और कहा कि कृषि लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को उनकी उपज का समुचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने सरकार से कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने, लागत कम करने तथा किसान हितैषी नीतियों को लागू करने की मांग की। कार्यक्रम के दौरान किसानों में उत्साह और एकजुटता का वातावरण देखने को मिला। वक्ताओं ने कहा कि यदि किसानों की जायज मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन व्यापक स्तर पर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के लिए बाध्य होगा। अधिवेशन के अंत में किसान हितों की रक्षा तथा कृषि क्षेत्र की उन्नति के लिए सामूहिक रूप से संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया गया। अलकनंदा घाट पर आयोजित इस विशाल किसान अधिवेशन ने यह स्पष्ट कर दिया कि किसान अपनी समस्याओं के समाधान और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर आवाज बुलंद करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रदेश अध्यक्ष सुरेश राजपूत ने कहा नकली अपवर्क दवाइयां तथा खाद आदि को प्रतिबंधित कर सरकार द्वारा पर्याप्त मात्रा में अपवर्क तथा खाद तथा छिड़काव हेतु कीटनाशक किसानों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराये जाए बिजली पानी की पर्याप्त व्यवस्था सरकार को सुनिश्चित करनी चाहिए तथा प्राकृतिक आपदा ग्रस्त किसानों को सरकार द्वारा समय से उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए इस अवसर पर प्रदेश प्रभारी श्री सुरेश चिल्सर पुरुषोत्तम गोरेला रूपेश कुमार कुलदीप शर्मा प्रदीप गिरी सचिन शर्मा कालूराम जयपुरिया राकेश चौहान वाजिद अली सहित भारी संख्या में कई प्रदेशों से आए किसान पदाधिकारी तथा भारी संख्या में किसान उपस्थित थे।

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