अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। कनखल स्थित प्रसिद्ध श्रीयंत्र मंदिर में आज हुए भंडारे के अवसर पर भक्त जनों के बीच अपने श्री मुख से ज्ञान की अनंत वर्षा करते हुए प्रातः स्मरणीय गुरुदेव आचार्य महामंडलेश्वर 1008 स्वामी विशोकानन्द जी महाराज ने कहा जो भक्तगुरु की शरणागत हो जाते हैं उन्हें ईश्वर तक पहुंचाने का मार्ग स्वयं ही मिल जाता ह गुरु मिलाते हैं ईश्वर से गुरु ही देते ज्ञान भव सागर की नैया के गुरु ही तारणहार जो भक्त गुरु के बताये मार्ग पर चलते हैं वह सदैव कल्याण के मार्ग पर होते हैं गुरु की भक्ति सीधे ईश्वर की भक्ति होती है गुरु की महिमा अनंत है इसलिए अपने गुरुजनों के बताये मार्ग पर चलते हुए भगवान का भजन करो भगवान श्री हरि का सिमरन ही मुक्ति का मार्ग है और यही कल्याण की युक्ति है।
