प्रेम का अनोखा बंधन मनुष्य को उस परम शक्ति के करीब ले आता है जिसे हम भगवान कहते है : महामंडलेश्वर ललितानंद

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। जब मनुष्य अपने हृदय में सच्ची भक्ति और अनंत प्रेम जगाता है, तो उसके विचार, उसकी भावना और उसके कर्म उसी दिव्य ऊर्जा से समाहित हो जाते हैं। भक्ति केवल वचन या कर्म तक सीमित नहीं होती, यह एक ऐसा अनुभव है जो आत्मा को शुद्ध करता है और मन को स्थिरता और शांति प्रदान करता है।

भगवान के प्रति प्रेम न केवल श्रद्धा का रूप है, बल्कि यह आत्मा का निवेदन भी है, जिसमें मनुष्य अपने सारे स्वार्थ और बाधाओं को छोड़कर केवल उस दिव्यता में खो जाता है। प्रेम और भक्ति की यह शक्ति मनुष्य को अकेलेपन, दुःख और भय से मुक्त कर देती है और उसे अनंत आनंद और संतोष की अनुभूति कराती है।जब व्यक्ति अपने जीवन में सच्ची भक्ति और प्रेम को अपनाता है, तो भगवान उसके जीवन के हर क्षण में उपस्थित हो जाते हैं। हर सांस, हर विचार, हर कर्म उस प्रेम की अभिव्यक्ति बन जाता है। ऐसे मनुष्य के लिए भगवान कोई दूरस्थ सत्ता नहीं रह जाते, वे उसके हृदय में निवास करते हैं और जीवन को मार्गदर्शन और आशा से भर देते हैं।

अंततः, भक्ति और प्रेम का यह अद्भुत मेल मनुष्य को भगवान से जोड़ता है, उसे आत्मा की गहराई तक ले जाता है और जीवन को दिव्यता की ओर मोड़ देता है। इसमें न केवल आध्यात्मिक शांति है, बल्कि एक ऐसी आंतरिक खुशी है जो शब्दों में व्यक्त करना कठिन है, पर अनुभव करने वाला हर क्षण महसूस कर सकता है।

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