श्री करौली शंकर महाराज ने भक्तों को ध्यान योग की गूढ़ साधना का महत्व समझाते हुए कहा कि ध्यान ही वह दिव्य माध्यम है, जिसके द्वारा साधक अपने चंचल मन को एकाग्र कर ईश्वर से सीधा संबंध स्थापित कर सकता है

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े में प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान श्री श्री 1008 महंत सरस्वत्याचार्य महाराज की पतित पावन पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर देशभर से पधारे संत-महापुरुषों और श्रद्धालु भक्तों की उपस्थिति में पूरा आश्रम भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम में साक्षात ईश्वर स्वरूप माने जाने वाले प्रख्यात संत श्री करौली शंकर महाराज ने भक्तों को ध्यान योग की गूढ़ साधना का महत्व समझाते हुए कहा कि ध्यान ही वह दिव्य माध्यम है, जिसके द्वारा साधक अपने चंचल मन को एकाग्र कर ईश्वर से सीधा संबंध स्थापित कर सकता ह। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने समस्त विचारों को ईश्वर भक्ति में केंद्रित कर देता है, तब वह न केवल ईश्वर तक पहुंचता है, बल्कि उसके जीवन में शांति, संतोष और आत्मिक आनंद का संचार होता है। ध्यान साधना वास्तव में गुरु कृपा और ईश्वर कृपा का महापर्व है, जो जीवन को सार्थक बना देता है।

इस अवसर पर सुदर्शन आश्रम अखाड़े के श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने अपने अमृतमय वचनों में कहा कि गुरुजनों के श्रीमुख से निकले पावन वचन गंगा के समान होते हैं, जो मनुष्य के जीवन को पवित्र और कल्याणकारी बनाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गंगा में स्नान करने से मनुष्य के पाप धुल जाते हैं, उसी प्रकार गुरु के वचनों को श्रद्धा और विश्वास के साथ ग्रहण करने से जीवन का उद्धार हो जाता है और मानव जीवन धन्य हो उठता है।प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर श्याम दास महाराज ने भगवान श्रीराम के जीवन का उल्लेख करते हुए गुरु के प्रति उनके अटूट समर्पण भाव को प्रेरणास्पद बताया। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने अपने गुरुजनों के आदेशों का पालन कर यह सिद्ध किया कि गुरु का स्थान जीवन में सर्वोपरि है और जो व्यक्ति गुरु के मार्गदर्शन में चलता है, वह कभी पथभ्रष्ट नहीं होता।त्यागी बाग स्थित पंचमुखी प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के श्री महंत गणेश दास जी महाराज ने गुरु की अनंत महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही वह ज्योति हैं, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उन्होंने भक्तों को संदेश दिया कि गुरु के प्रति श्रद्धा, सेवा और समर्पण भाव ही सच्ची साधना का मार्ग है, जिससे मन की शुद्धि और आत्मिक उन्नति संभव होती है।श्री महंत बिहारी शरण महाराज ने अपने विचारों में कहा कि गुरु का मार्गदर्शन मनुष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है। उन्होंने भगवान श्रीराम की अनंत महिमा का गुणगान करते हुए बताया कि भगवान की भक्ति और गुरु की शरण में जाने से जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं और आत्मा को परम शांति प्राप्त होती है।

महंत हरेंद्र दास महाराज ने ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ज्ञान ही वह शक्ति है, जो मनुष्य को अज्ञानता के बंधनों से मुक्त कर उसके जीवन का उद्धार करती है। उन्होंने कहा कि सच्चा ज्ञान वही है, जो मनुष्य को धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करे। इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन में उपस्थित श्रद्धालु भक्तों ने संतों क दिव्य वचनों को सुनकर आत्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव किया। पूरे आश्रम में भक्ति, श्रद्धा और ध्यान साधना की अद्भुत छटा बिखरी रही, जिससे यह पुण्य अवसर वास्तव में एक दिव्य महापर्व के रूप में स्मरणीय बन गया।

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