प्रयागराज रामलीला उत्कृष्टता सम्मान 2026 – श्रीरामकथा के साधकों को समर्पित संस्कृति, संस्कार और सामाजिक चेतना का महोत्सव

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

प्रयागराज। तीर्थराज प्रयागराज की पावन धरती पर श्रीरामकथा की सांस्कृतिक चेतना, भारतीय जीवन-मूल्यों और लोकपरंपराओं को समर्पित प्रयागराज रामलीला उत्कृष्टता सम्मान 2026 का आयोजन परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, नैनी में नुक्कड़ नाट्य अभिनय संस्थान, प्रयागराज द्वारा किया गया। यह आयोजन श्रीरामलीला की समृद्ध परंपरा को जीवंत रखने वाले साधकों, कलाकारों, आयोजकों और संस्कृति के संवाहकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। इस गरिमामयी आयोजन में परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। प्रयागराज के महापौर श्री गणेश केसरवानी सहित अनेक विशिष्ट अतिथि अपनी गरिमामयी उपस्थिति रही। परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि श्रीरामकथा भारतीय संस्कृति की वह जीवनधारा है, जो सदियों से समाज को मर्यादा, करुणा, त्याग, सेवा, कर्तव्य और आदर्श जीवन की प्रेरणा देती आ रही है। रामलीला के मंच पर प्रस्तुत होने वाले प्रसंग केवल पौराणिक आख्यान नहीं, बल्कि मानवीय संबंधों, सामाजिक उत्तरदायित्वों और नैतिक मूल्यों के जीवंत पाठ हैं। श्रीराम का मर्यादित आचरण, माता सीता की गरिमा, लक्ष्मण का समर्पण, भरत का त्याग और हनुमान जी की सेवाभावना आज भी जीवन की जटिलताओं के बीच सही मार्ग चुनने की प्रेरणा देते हैं। प्रयागराज रामलीला उत्कृष्टता सम्मान 2026 का व्यापक संदेश आस्था, स्वच्छता, संस्कृति, समर्पण और परंपरा के परस्पर संबंधों को रेखांकित करता है। भारतीय संस्कृति में पवित्रता का भाव विचारों, व्यवहार, परिवेश और सामाजिक जीवन की निर्मलता से भी जुड़ा है। विशेष रूप से तीर्थराज प्रयागराज जैसी पावन भूमि पर स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक स्थलों के प्रति उत्तरदायित्व का महत्व और बढ़ जाता है। श्रीराम के आदर्श हमें संदेश देते हैं कि धर्म का वास्तविक स्वरूप आचरण में प्रकट होता है। जनकल्याण, लोकसेवा, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति सम्मान ही संस्कृति को जीवन्त बनाते हैं। इस दृष्टि से रामलीला की परंपरा सांस्कृतिक उत्सव होने के साथ सामाजिक जागरण का प्रभावशाली माध्यम भी है। नुक्कड़ नाट्य अभिनय संस्थान, प्रयागराज द्वारा आयोजित यह सम्मान समारोह लोकनाट्य और रामलीला से जुड़े ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। आज जब डिजिटल माध्यमों और तेजी से बदलती जीवनशैली के बीच नई पीढ़ी के सामने सांस्कृतिक जुड़ाव की अनेक चुनौतियाँ हैं, तब लोककलाओं का संरक्षण और उन्हें समकालीन सामाजिक प्रश्नों से जोड़ना विशेष प्रासंगिकता रखता है।परमार्थ त्रिवेणी पुष्प, नैनी में इस आयोजन का होना प्रयागराज की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को एक नई अभिव्यक्ति प्रदान करता है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम की परंपरा से जुड़ी यह धरती सदियों से ज्ञान, साधना, साहित्य और संस्कृति की प्रेरणास्थली रही है। ऐसी भूमि पर श्रीरामकथा के साधकों का सम्मान भारतीय परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सान्निध्य इस आयोजन को आध्यात्मिक प्रेरणा प्रदान की। श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में धारण करना, सेवा को साधना बनाना, प्रकृति का सम्मान करना और समाज में प्रेम एवं समरसता का विस्तार करना ही भारतीय संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति है।प्रयागराज रामलीला उत्कृष्टता सम्मान 2026 इसी विचार को केंद्र में रखते हुए यह संदेश दे रहा है कि परंपराओं का संरक्षण तभी सार्थक है, जब वह वर्तमान को दिशा दे और भविष्य को संस्कार प्रदान करे।श्रीरामकथा के साधकों को समर्पित यह आयोजन कला के सम्मान के साथ उन जीवन-मूल्यों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है जो भारतीय समाज को जोड़ते हैं, मानवीय संवेदना को पुष्ट करते हैं और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को निरंतर समृद्ध बनाते हैं।इस अवसर पर डा पुष्पेंद्र जी, श्री संतोष गुप्ता जी, श्री माधव जी, श्री परेश जी और प्रयागराज, नैनी और पूरे क्षेत्र के श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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