कारगिल विजय दिवस पर अमर शहीद बलिदानियों को परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धाजंलि

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर भारत माता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वाेच्च बलिदान देने वाले सभी अमर वीर बलिदानियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि कारगिल विजय दिवस भारत की आत्मा, उसके स्वाभिमान, उसके साहस और उसकी सनातन चेतना की विजय का दिवस है। यह दिन हमें उन वीर सपूतों के अद्वितीय पराक्रम, त्याग, अनुशासन और राष्ट्रनिष्ठा को स्मरण करने का अवसर देता है, जिन्होंने अपने वर्तमान का बलिदान देकर हमारे भविष्य को सुरक्षित बनाया। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि कारगिल की ऊँची बर्फीली चोटियाँ केवल युद्ध की साक्षी नहीं हैं, वे उन अमर बलिदानों की तपोभूमि हैं जहाँ भारत के वीर जवानों ने अपने रक्त से राष्ट्रप्रेम का ऐसा इतिहास लिखा, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ सदैव गर्व के साथ स्मरण करेंगी। जब पूरा देश अपने घरों में सुरक्षित था, तब हमारे सैनिक शून्य से नीचे तापमान, दुर्गम पर्वतों और विषम परिस्थितियों के बीच केवल एक संकल्प लेकर डटे हुए थे, भारत की आन, बान और शान की रक्षा के हेतु। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने अपने परिवारों से ऊपर राष्ट्र को रखा, अपने सुखों से ऊपर कर्तव्य को रखा और अपने जीवन से ऊपर भारत माता के सम्मान को रखा। यही त्याग उन्हें अमर बनाता है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि राष्ट्र केवल मानचित्र पर बनी सीमाओं का नाम नहीं है। राष्ट्र हमारी संस्कृति है, हमारी सभ्यता है, हमारी मातृभाषाएँ हैं, हमारे तीर्थ हैं, हमारी नदियाँ हैं, हमारा हिमालय है और करोड़ों भारतीयों की साझा चेतना है। कारगिल के वीरों ने केवल सीमाओं की रक्षा नहीं की, बल्कि भारत की आत्मा, उसकी अस्मिता और उसके गौरव की रक्षा की। उनके कारण ही हम स्वतंत्र आकाश में साँस लेते हैं, अपने पर्व मनाते हैं, अपने विचार व्यक्त करते हैं और अपने सपनों को साकार कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में वीरता और करुणा एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। एक सैनिक के हाथ में शस्त्र इसलिए होता है ताकि समाज के हाथों में शास्त्र बने रहें, बच्चों के हाथों में पुस्तकें रहें और प्रत्येक नागरिक सुरक्षित एवं सम्मानपूर्ण जीवन जी सके। सैनिकों का त्याग सम्पूर्ण समाज की शान्ति का आधार है। उन्होंने कहा कि आज हमें ऐसा भारत बनाना है जो केवल आर्थिक रूप से समृद्ध हो और नैतिक रूप से भी विश्व के लिए प्रेरणा बने। जिस धरती की रक्षा हमारे वीर सैनिक अपने प्राणों की आहुति देकर करते हैं, उस धरती को स्वच्छ, हरित और जीवनदायिनी बनाए रखना भी हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। स्वच्छ नदियाँ, सुरक्षित वन, हरित पर्वत और स्वच्छ पर्यावरण भी सशक्त राष्ट्र की पहचान हैं। उन्होंने युवाओं से विशेष आह्वान करते हुए कहा कि कारगिल के वीरों से प्रेरणा लेकर वे अपने जीवन में अनुशासन, निष्ठा, परिश्रम, साहस और सेवा को अपनाएँ। आज राष्ट्र को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल सफल ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, संस्कारित और उत्तरदायी नागरिक बनें। यही भारत के उज्ज्वल भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।

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