सिर्फ सत्य का मार्ग और अंतर मन का शुद्धिकरण ही ईश्वर की अनुभूति कर सकता है : सुशील कुमार

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। रोशनाबाद कोर्ट न्यायालय बार परिसर स्थित मंदिर में भगवान रविदास जयंती बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ बार द्वारा तथा वकालत कर रहे वकीलों द्वारा बनाई गई इस अवसर पर जिला जज श्री नरेंद्र दत्त जी ने भी भगवान रविदास मंदिर में आकर भगवान रविदास की आराधना की तथा उन्हें नमन किया इस अवसर पर बोलतेहुए पूर्व बार अध्यक्ष एडवोकेट श्री सुशील कुमार ने कहाभक्त भगवान रैदास, जिन्हें रविदास भी कहा जाता है, भक्ति आंदोलन के ऐसे संत थे जिन्होंने सत्य, प्रेम और समानता के मार्ग पर चलकर ईश्वर की प्राप्ति का सजीव अनुभव कराया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर तक पहुँचने के लिए बाहरी आडंबर, ऊँच-नीच या कर्मकांड आवश्यक नहीं, बल्कि अंतःकरण की शुद्धता और सत्यनिष्ठ आचरण ही पर्याप्त है। उन्होंने समाज के सबसे साधारण वर्ग में रहते हुए भी आत्मिक ऊँचाइयों को छुआ और भक्ति को जन-जन के लिए सुलभ बनाया।रैदास जी का सत्य का मार्ग आत्मचिंतन और कर्म की पवित्रता से होकर गुजरता है। वे कहते हैं कि मनुष्य यदि अपने कर्मों मेंईमानदारी, करुणा और सेवा का भाव रखे, तो वही ईश्वर की सच्ची उपासना है। उनके लिए भक्ति का अर्थ था जीवन को सत्य के अनुरूप ढालना, जहाँ अहंकार, लोभ और द्वेष के लिए कोई स्थान न हो। सत्य बोलना, सत्य करना और सत्य में जीना—यही उनके उपदेशों का सार है।उन्होंने प्रेम को ईश्वर की अनुभूति का सबसे सरल साधन बताया। रैदास जी के अनुसार जब हृदय में सभी प्राणियों के प्रति समान प्रेम जाग्रत होता है, तब ईश्वर स्वयं प्रकट होते हैं। यह प्रेम किसी एक रूप या स्थान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि जीवन के हर क्षण में करुणा बनकर बहता है। इसी प्रेम के कारण भेदभाव की दीवारें गिरती हैं और आत्मा मुक्त होती है।भक्त रैदास ने नाम-स्मरण और सहज भक्ति पर विशेष बल दिया। उनका विश्वास था कि ईश्वर का नाम मन को निर्मल करता है और सत्य के पथ पर स्थिर रखता है। जब मनुष्य निरंतर स्मरण के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करता है, तब साधारण जीवन भी साधना बन जाता है। यही साधना अंततः ईश्वर की अनुभूति में परिवर्तित हो जाती है।इस प्रकार संत रैदास का जीवन और संदेश हमें सिखाता है कि सत्य का मार्ग कोई दूरस्थ या कठिन पथ नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन में ही निहित है। सेवा, प्रेम, समानता और सत्यनिष्ठ कर्म के द्वारा प्रत्येक भक्त ईश्वर को प्राप्त कर सकता है और उसी आनंद को अनुभव कर सकता है जिसकी अनुभूति संत रैदास ने अपने जीवन में की। इस अवसर पर श्री शिव कुमार एडवोकेट श्री सुशील कुमार एडवोकेट मुकेश कुमार एडवोकेट रवि एडवोकेट बालवीर एडवोकेट मुंगेर साहब एडवोकेट श्री जसविंदर सिंह मोंटू धर्मेश कुमार एडवोकेट श्री विपिन चंद द्विवेदी अजीत वर्मा किरतपाल सिंह रविंद्र सहगल करण जाति राम संदीप सत्पुरिया गजेंद्र सिंह सहित भारी संख्या में एडवोकेट उपस्थित थे इस अवसर पर परिवार न्यायालय से श्री अजय चौधरी जी सहित भारी संख्या में सभी न्यायिक अधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित थे इस अवसर पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों लोगों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया तथा भगवान रविदास जी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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