फूड सेफ्टी डे पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अन्नं ब्रह्मः का दिया संदेेश

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

ऋषिकेश। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने मानवता से आह्वान किया कि भोजन को केवल उपभोग की वस्तु नहीं, बल्कि ईश्वर का प्रसाद और जीवन का आधार मानकर उसका सम्मान करें। उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं है, बल्कि यह मानवीय गरिमा, सामाजिक न्याय, पर्यावरणीय संतुलन और आध्यात्मिक मूल्यों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में अन्न को ब्रह्म का स्वरूप माना गया है। हमारे शास्त्रों में अन्नं ब्रह्म का उद्घोष केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है। अन्न हमें केवल शारीरिक ऊर्जा नहीं देता, बल्कि हमारी चेतना, विचार और संस्कारों को भी प्रभावित करता है इसलिए भोजन की शुद्धता, सुरक्षा और उपलब्धता प्रत्येक व्यक्ति का मूल अधिकार है।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज एक ओर विश्व में लाखों टन भोजन प्रतिवर्ष बर्बाद हो जाता है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों लोग भूख और कुपोषण का सामना कर रहे हैं। यह केवल आर्थिक या सामाजिक असमानता का प्रश्न नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सामूहिक उत्तरदायित्व का विषय है। यदि हमारे आसपास कोई व्यक्ति भूखा सोता है, तो हमारी समृद्धि अधूरी है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि भोजन सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक होना चाहिए। दूषित और असुरक्षित भोजन न केवल बीमारियों को जन्म देता है, बल्कि समाज की उत्पादकता और विकास को भी प्रभावित करता है। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकारों, उद्योगों, किसानों, उपभोक्ताओं और नागरिक समाज सभी की साझा भूमिका है।

 

उन्होंने कहा कि विश्व के अनेक देशों में अभी भी भूख और कुपोषण गंभीर चुनौती बने हुए हैं। ऐसे समय में हमें भोजन की बर्बादी रोकने, स्थानीय और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने तथा जरूरतमंदों तक भोजन पहुँचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। भोजन को फेंकने की संस्कृति के स्थान पर साझा करने की संस्कृति विकसित करनी होगी।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि खाद्य सुरक्षा का पर्यावरण से भी गहरा संबंध है। भूमि, जल, जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के बिना भविष्य की पीढ़ियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। टिकाऊ कृषि, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग आज समय की आवश्यकता है।

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे भोजन के प्रति कृतज्ञता का भाव विकसित करें, भोजन की बर्बादी रोकें और जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आएँ। प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने स्तर पर थोड़ा भी प्रयास करे तो भूख और खाद्य असुरक्षा की चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अन्न केवल भोजन नहीं, ईश्वर का वरदान है। अन्न का सम्मान करें, उसे प्रसाद मानकर ग्रहण करें और उसकी बर्बादी रोकें। हमारी थाली में जो है, वह केवल हमारा अधिकार नहीं, बल्कि समस्त मानवता की साझी धरोहर है। आइए, ऐसा विश्व बनाएं जहाँ कोई भूखा न सोए और सुरक्षित, पौष्टिक भोजन प्रत्येक व्यक्ति तक सम्मानपूर्वक पहुँचे।

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