अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। सादर निवेदन है कि हरिद्वार की पहचान माँ गंगा और यहां स्थित हजारों प्राचीन आश्रमों, मठों, अखाड़ों एवं संत परंपराओं से है। कुंभ मेला-2027 के दौरान देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु एवं संत-महात्मा हरिद्वार पधारेंगे। इनमें से बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न आश्रमों में निवास, भोजन, चिकित्सा, सत्संग एवं अन्य धार्मिक सेवाओं का लाभ प्राप्त करते हैं।
कुंभ के अवसर पर तीर्थनगरी के आश्रम एक प्रकार से सरकार के सहयोगी सेवा केन्द्र के रूप में कार्य करते हैं तथा लाखों श्रद्धालुओं के आवास, भोजन एवं मार्गदर्शन का दायित्व निभाते हैं। इस कारण आश्रमों पर आर्थिक, प्रशासनिक एवं संसाधनगत भार अत्यधिक बढ़ जाता है।
अतः अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद की ओर से निम्नलिखित मांगें आपके समक्ष प्रस्तुत की जाती हैं:
प्रमुख मांगें
– कुंभ अवधि में आश्रमों पर लगने वाले सभी प्रकार के वाणिज्यिक (Commercial) कर एवं शुल्क पूर्णतः समाप्त किये जाएं।
– हाउस टैक्स, सीवर टैक्स, जलकर एवं अन्य स्थानीय निकाय करों से आश्रमों को स्थायी रूप से कमर्शियल मुक्त किया जाए और कुंभ अवधि हेतु पूर्ण छूट प्रदान की जाए।
– आश्रमों को धार्मिक एवं सेवा संस्थान मानते हुए विद्युत दरों को घरेलू/धार्मिक श्रेणी में रखा जाए तथा कुंभ अवधि के विद्युत बिलों में कम से कम 70 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाए।
– कुंभ मेला बजट से सभी आश्रमों के रंग-रोगन, सौंदर्यीकरण एवं कुंभ थीम आधारित सजावट का कार्य निःशुल्क कराया जाए।
– आश्रमों की क्षमता एवं पंजीकरण के आधार पर यात्री सेवा हेतु निःशुल्क राशन सामग्री (आटा, चावल, दाल, चीनी, तेल, मसाले आदि) उपलब्ध कराई जाए।
– हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा आश्रमों के भवन मानचित्र (नक्शे) सरल प्रक्रिया से स्वीकृत किये जाएं तथा शुल्क में विशेष छूट प्रदान की जाए।
– आश्रमों में अस्थायी यात्री निवास, पंडाल, रसोई एवं सेवा शिविर स्थापित करने हेतु विशेष निःशुल्क व्यवस्थाएं उपलब्ध करायी जाए।
– आश्रमों को स्वच्छ पेयजल एवं अतिरिक्त जल कनेक्शन निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएं।
– कुंभ अवधि में आश्रमों के आसपास सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट एवं सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए।
– प्रत्येक आश्रम को उसके क्षेत्रफल एवं यात्री क्षमता के अनुसार पर्याप्त पार्किंग एवं यातायात पास उपलब्ध कराए जाएं।
– आश्रमों में आने वाले संतों, सेवकों एवं स्वयंसेवकों हेतु विशेष पहचान पत्र एवं वाहन पास जारी किये जाएं।
– आश्रम क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर, एम्बुलेंस एवं प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
– आश्रमों में सीसीटीवी, सुरक्षा बैरियर एवं पुलिस सहायता केन्द्र स्थापित किये जाएं।
– कुंभ अवधि में आश्रमों के लिए गैस सिलेंडर, अग्निशमन उपकरण एवं अन्य आवश्यक सामग्री की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
– आश्रमों द्वारा संचालित भंडारों, सत्संगों एवं धार्मिक आयोजनों हेतु आवश्यक अनुमति एकल खिड़की (Single Window System) के माध्यम से प्रदान की जाए।
– कुंभ मेला प्रशासन द्वारा सभी आश्रमों की आधिकारिक सूची, लोकेशन एवं सेवा विवरण का डिजिटल प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा प्राप्त हो सके।
– कुंभ मेला क्षेत्र के सभी आश्रमों को “तीर्थ यात्री सेवा केन्द्र” का दर्जा प्रदान किया जाए।
– गौशाला संचालित आश्रमों को चारा, भूसा एवं पशु चिकित्सा सुविधाओं में विशेष सहायता प्रदान की जाए।
– आश्रमों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता सामग्री एवं कूड़ा संग्रहण की विशेष व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।
– कुंभ मेला-2027 की विभिन्न समितियों एवं परामर्श मंडलों में संत समाज एवं आश्रम प्रतिनिधियों को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
आदरणीया कुंभ केवल एक प्रशासनिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का विश्वव्यापी आध्यात्मिक महापर्व है। आश्रम एवं संत समाज इस महापर्व की आत्मा हैं। अतः आश्रमों को सुविधाएं प्रदान करना केवल संस्थागत सहायता नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सेवा व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि उपरोक्त मांगों पर सकारात्मक विचार करते हुए आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें।
