कनखल श्री हरिहरानंद पब्लिक स्कूल में प्रातः स्मरणीय 1008 महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री संतोष पुरी गीता भारती जी महाराज की पावन स्मृति में बड़े ही धूमधाम, संत समागम का आयोजन किया गया

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। आश्रम परिसर को आकर्षक फूलों, रंग-बिरंगी सजावट और दिव्य रोशनी से अलंकृत किया गया था, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिमय भावनाओं से ओत-प्रोत हो उठा। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी और संत महापुरुषों के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके पश्चात संतों का माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान महामंडलेश्वर 1008 श्री शरद पुरी जी महाराज ने कहा कि संतों का जीवन सदैव समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए समर्पित रहता है। उन्होंने कहा कि संत महापुरुषों द्वारा किए जाने वाले प्रत्येक कार्य में जगत कल्याण की भावना निहित होती है और उनका उद्देश्य मानव मात्र को धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करना होता है।

उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संतों के सान्निध्य से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञा पुरी महाराज ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि संत समाज के सच्चे पथप्रदर्शक होते हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का प्रतीक होता है तथा वे निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा में निरंतर तत्पर रहते हैं। इस अवसर पर स्वामी नित्यम पुरी महाराज ने कहा कि प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान केवल भक्तों के सांसारिक जीवन का ही कल्याण नहीं करते, बल्कि उनका लोक एवं परलोक दोनों संवार देते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु की कृपा से जीवन की कठिनाइयाँ सरल हो जाती हैं और व्यक्ति आत्मिक शांति तथा आनंद की अनुभूति करता है। कार्यक्रम के दौरान संतोष पुरी गीता भारती जी महाराज के जीवन, उनके तप, त्याग और समाज सेवा के कार्यों का भी विस्तृत स्मरण किया गया तथा उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया गया। संत समागम के उपरांत एक विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे की व्यवस्था अत्यंत सुव्यवस्थित एवं अनुशासित ढंग से की गई थी और सेवा में लगे स्वयंसेवकों ने पूर्ण समर्पण भाव से अपनी सेवाएँ प्रदान कीं। पूरे आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन, सत्संग और आध्यात्मिक प्रवचनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। अंत में संत महापुरुषों ने समस्त श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान करते हुए उनके सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इस प्रकार यह भव्य संत समागम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम बनकर सभी के हृदय में अविस्मरणीय छाप छोड़ गया।

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