अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का दीप प्रज्वलित कर विधिवत उद्घाटन

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

ऋषिकेश। अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का भव्य और दिव्य शुभारंभ आज परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर दीप प्रज्वलन के साथ सम्पन्न हुआ। उद्घाटन समारोह में परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, उत्तराखंड के पांचवें मुख्यमंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी, पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी, बाबाजी शिवानंद जी तथा विश्व के 80 से अधिक देशों से आये योगाचार्यों, साधकों और योग जिज्ञासुओं ने दीप प्रज्वलित कर इस महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि योग और संगीत का संगम जीवन को भीतर से रूपांतरित कर देता है। जब श्वास की लय और सुरों की ध्वनि एक हो जाती है, तब जीवन स्वयं एक सुंदर साधना बन जाता है।

श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी ने कहा कि परमार्थ निकेतन का पूरा वातावरण आज वैश्विक एकता, शांति और आध्यात्मिकता की दिव्य ऊर्जा से आलोकित हो रहा है। विश्व के अनेक देशों से आये साधक, योगाचार्य और जिज्ञासु एक साथ योग, ध्यान और साधना के माध्यम से मानवता, प्रेम और समरसता का संदेश दे रहे हैं। यह संगम वास्तव में “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को साकार कर रहा है, यही भावना उत्तराखंड़ के मूल में समाहित हैं।

पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, शांत और जागरूक बनाने की एक संपूर्ण जीवनशैली है। आज की तेज गति से बदलती दुनिया में योग हमें भीतर की शांति, करुणा और जागरूकता से जोड़ता है। योग हमें प्रकृति, समाज और समस्त मानवता के साथ एकता का अनुभव कराता है तथा हमें प्रेम, सेवा और समरसता के मार्ग पर अग्रसर करता है

पावन गंगा जी के तट पर आयोजित इस दिव्य अवसर पर वैश्विक योग परिवार की एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। विश्व के विभिन्न कोनों से आये साधक और योगाचार्य भारतीय संस्कृति और योग परम्परा के इस महाकुंभ के साक्षी बने।

माननीय निशंक जी ने परम पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी के साथ माँ गंगा की दिव्य आरती की। गंगा आरती के मंत्रों, दीपों की ज्योति और भक्तों की आस्था ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

स्वामी जी ने माननीय निशंक जी का अभिनन्दन रूद्राक्ष के दिव्य पौधे और अंगवस्त्र भेंट कर किया गया। साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में पधारे भारत सहित विभिन्न देशों के योगाचार्यों का अंगवस्त्र और रूद्राक्ष की माला पहनाकर सम्मानपूर्वक अभिनन्दन किया। यह सम्मान भारतीय संस्कृति की उस परम्परा को दर्शाता है जिसमें अतिथि को देवतुल्य माना गया है।

प्रसिद्ध ड्रम वादक शिवमणि जी ने अपनी अद्भुत ताल और ऊर्जा से पूरे वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके ड्रम की गूंजती लय पर उपस्थित साधक, योगी और अतिथि स्वतः ही झूम उठे और आनंदमय गरबा में सम्मिलित हो गये।

जब रूना रिजवी शिवमणि जी की सूफियाना आवाज और शिवमणि जी के ड्रम की दिव्य ताल एक साथ गूंजने लगी, तब योगी, साधक और श्रोता उस अद्भुत संगीत में खो गये। य

पूरे परमार्थ गंगा तट पर “शिव शिव शंकरा” और “हर हर महादेव” के जयघोष गूंज उठे। गंगा तट पर उपस्थित अनेकों साधकों की ऊर्जा और भक्ति ने इस उद्घाटन समारोह को अविस्मरणीय बना दिया। यह महोत्सव केवल योग का उत्सव नहीं, बल्कि वैश्विक परिवार को एक सूत्र में जोड़ने का आध्यात्मिक सेतु है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!