सनातन धर्म की अलख जगाने में अग्रणी गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े, का पटृाभिषेक कार्यक्रम संपन्न

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा सनातन धर्म की ज्योति को जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। अखाड़े के अध्यक्ष परम पूज्य संजीवन नाथ महाराज के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणादायी नेतृत्व में अखाड़े के संत, महंत, महामंडलेश्वर और नाथ संप्रदाय के साधु-संत भारत ही नहीं, बल्कि अनेक देशों में भी भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की दिव्य पताका को गौरव के साथ फहरा रहे हैं। इसी श्रृंखला को आगे बढ़ते हुए अखाड़े ने परम पूज्य श्री कंचन सोनी जी महाराज को महामंडलेश्वर पद पर विभूषित किया साथ ही पूनम जी महाराज हरियाणा को महामंडलेश्वर पद पर विभूषित किया इसी क्रम में श्री सुनील शर्मा जी महाराज राजस्थान को महामंडलेश्वर पद पर विभूषित किया गया इसी क्रम को आगे बढ़ते हुए श्री कृष्णकांत अत्रेय जी को, महामंडलेश्वर पद पर विभूषित किया श्री नीरज जी महाराज उत्तर प्रदेश को महामंडलेश्वर पद पर विभूषित किया रेखा कुमारी कौशल जी महाराज को महामंडलेश्वर पद पर विभूषित किया गया महामंडलेश्वर सुमन देवी जी को भी विभूषित किया गया महामंडलेश्वर पद पर बाबूराव त्रयंबक महाराष्ट्र महामंडलेश्वर सुनील शर्मा राजस्थान महामंडलेश्वर सचिन कुमार बाबासाहेब काल्पनी आदि संत माहापुरुषों को तपोबल के आधार पर, उन्हें मंडली के ईश्वर के रूप में महामंडलेश्वर पद पर अलंकृत करते हुए सनातन की धर्म ध्वजा फहराने के लिए प्रेरित किया हालांकि यह सभी महापुरुष अपने तपोबल के आधार पर, ज्ञान तथा वैराग्य की एक जीवंत पराकाष्ठा है किंतु उन्हें यथा समय सम्मन देना अखाड़े ने अपना दायित्व समझकर उन्हें इस पद पर अलंकृत किया है गुरु श्री गोरखनाथ की महान तपस्या, योग साधना और लोककल्याण की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अलख अखाड़ा समाज में धर्म, अध्यात्म, राष्ट्रभक्ति, सेवा, संस्कार और मानवीय मूल्यों का व्यापक प्रचार-प्रसार कर रहा है। अखाड़े का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज को आध्यात्मिक रूप से जागृत कर मानव जीवन को सत्य, करुणा, सेवा, संयम और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करना है। अध्यक्ष संजीवन नाथ महाराज का मानना है कि सनातन धर्म सम्पूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग है। यह किसी एक वर्ग, जाति या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना के साथ सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार मानने का संदेश देता है। इसी विचारधारा को आत्मसात करते हुए गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा समाज के प्रत्येक वर्ग तक धर्म और अध्यात्म का प्रकाश पहुँचा रहा है। अखाड़े के संत-महापुरुष विभिन्न राज्यों में धर्म सभाएँ, संत सम्मेलन, श्रीमद्भागवत कथा, शिव महापुराण, यज्ञ, रुद्राभिषेक, भंडारे, सत्संग, योग शिविर तथा जनजागरण कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का सतत प्रयास कर रहे हैं। इन कार्यक्रमों में हजारों श्रद्धालु सहभागी बनकर भारतीय आध्यात्मिक विरासत से प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं। केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अखाड़े के संत भारतीय संस्कृति, योग, ध्यान और सनातन दर्शन का संदेश देकर विश्व समुदाय को शांति, सद्भाव और मानवता का मार्ग दिखा रहे हैं। विदेशों में रहने वाले भारतीयों के साथ-साथ अन्य देशों के नागरिक भी भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के प्रति आकर्षित होकर सनातन संस्कृति के मूल सिद्धांतों को जानने और अपनाने का प्रयास कर रहे हैं। यह गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े के निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि भारतीय संस्कृति की प्रतिष्ठा वैश्विक स्तर पर और अधिक सुदृढ़ हो रही है। संजीवन नाथ महाराज के नेतृत्व में अखाड़ा केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सेवा के अनेक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। निर्धनों की सहायता, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कार्य तथा जरूरतमंदों की सेवा जैसे अनेक जनकल्याणकारी कार्य अखाड़े की पहचान बन चुके हैं। आज का महामंडलेश्वर, पटृाभिषेक.कार्यक्रम, परम पूज्य श्री शंकर नाथ जी महाराज परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री जगदीश प्रजापति जी महाराज परम पूज्य महामंडलेश्वर श्री 1008 हर्षिता जी महाराज परम पूज्य महामंडलेश्वर 1008 साइई मा नाथ महाराज जैसे तपो मूर्ति संत महापुरुषों के प्रतीत पावन सानिध्य में संपन्न इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य सनातन धर्म के धर्म पताका फहराता है समाज में अखाड़े के प्रति लोगों की आस्था और विश्वास निरंतर बढ़ता जा रहा है। महंतों एवं महामंडलेश्वरों का कहना है कि भारत की आत्मा उसकी संस्कृति और सनातन परंपरा में निहित है। यदि नई पीढ़ी अपने धर्म, संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ी रहेगी, तभी राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकेगी। इसी उद्देश्य को लेकर गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। धर्माचार्यों का मानना है कि आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव, सेवा और नैतिक मूल्यों को पुनः स्थापित किया जाए। गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा इसी उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ रहा है और सनातन धर्म की अखंड ज्योति को देश-विदेश में प्रज्वलित कर भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा को नई ऊर्जा प्रदान कर रहा है।‌ सनातन धर्म, राष्ट्र सेवा और मानव कल्याण के इस महान अभियान में गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा आज एक सशक्त आध्यात्मिक संस्था के रूप में स्थापित हो चुका है। अध्यक्ष परम पूज्य संजीवन नाथ महाराज के नेतृत्व में अखाड़े का यह संकल्प निरंतर आगे बढ़ रहा है कि भारत की आध्यात्मिक चेतना, ऋषि-मुनियों की परंपरा और गुरु श्री गोरखनाथ का अमर संदेश आने वाली पीढ़ियों तक उसी तेजस्विता के साथ पहुँचता रहे, जिससे विश्व पटल पर भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की पताका सदैव गौरव के साथ लहराती रहे।, इस अवसर पर श्रीमती अंजलि अरोड़ा ऋषिकेश सोनिया सिंह जौनपुर कुंवर सिंह जी बिशनपुर वाले सुनील शर्मा कोतवाल कमल मुनि महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष भक्तजन उपस्थित थे।

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