पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में संत भक्ति की अनुपम गाथाओं का हुआ रसपूर्ण श्रवण

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में संत परंपरा की अमूल्य विरासत ‘‘मेरे नामदेव-भक्तमाल कथा’’ का दिव्य एवं भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, प्रेरणामयी उपस्थिति, आशीर्वचन एवं उद्बोधन सभी श्रद्धालुओं के लिये आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम स्रोत बना। कथा के दिव्य वक्ता गौवत्स श्री राधाकृष्ण जी महाराज ने अपने श्रीमुख से भक्तमाल की अमृतमयी कथाओं का ऐसा रसपान करा रहे हैं कि श्रोतागण भक्ति, प्रेम और समर्पण के अद्भुत संसार में प्रवेश कर रहे हैं। भक्तमाल कथा पूज्य संतों के तप, त्याग, प्रेम और परमात्मा के प्रति अटूट समर्पण की जीवंत अनुभूति है। भक्तमाल कथा का प्रत्येक प्रसंग मानो श्रद्धा के सुप्त बीजों को जागृत कर रहा है। भक्तमाल कथा पूज्य संतों के जीवन का ऐसा प्रकाशस्तंभ है जो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर, अहंकार से समर्पण की ओर और अशांति से आनंद की ओर ले जाती है। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि संतों का जीवन मानवता के लिये ईश्वर का खुला संदेश है। उन्होंने कहा कि भक्तमाल की कथाएँ हमें संदेश देती हैं कि सच्ची भक्ति हृदय की निर्मलता, सेवा की भावना और परमात्मा के प्रति अटूट विश्वास में निहित है। आज जब संसार तनाव, विभाजन और भौतिकता की दौड़ में उलझा हुआ है, तब पूज्य संतों की जीवनगाथाएँ मानवता को प्रेम, करुणा और एकता का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने कहा कि पूज्य संतों ने अपना जीवन केवल अपने लिये नहीं जिया, बल्कि उन्होंने सम्पूर्ण समाज के कल्याण को अपना जीवन लक्ष्य बनाया। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर यदि हम अपने भीतर सेवा, सद्भाव और संवेदनशीलता के भाव विकसित करें तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः संभव हो सकता है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संत परंपरा के ऐसे तेजस्वी नक्षत्र हैं, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि भगवान को न विद्वत्ता चाहिए, न वैभव, न बाहरी आडंबर, उन्हें केवल निष्कलुष प्रेम चाहिए। संत नामदेव जी का जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि जब भक्त का हृदय पूर्ण समर्पण से भर जाता है, तब भगवान स्वयं उसके प्रेम के अधीन हो जाते हैं। संत ज्ञानेश्वर ज्ञान के सूर्य थे और संत नामदेव प्रेम के चन्द्रमा थे। दोनों ने मिलकर पूरे भारत में भक्ति की अलख जगाई। संत नामदेव महाराज भक्ति आंदोलन के उन महान संतों में से हैं जिन्होंने प्रेम, नाम-स्मरण और ईश्वर के प्रति अटूट समर्पण का संदेश दिया। वे वास्तव में महाराष्ट्र के नरसी हैं। गौवत्स श्री राधाकृष्ण जी महाराज ने कथा के माध्यम से अनेक पूज्य संतों के जीवन प्रसंगों को अत्यंत भावपूर्ण शैली में बताते हुये कहा कि ईश्वर तक पहुँचने का सबसे सरल मार्ग प्रेम और भक्ति का है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य अपने अहंकार को त्यागकर प्रभु के चरणों में समर्पित हो जाता है, तब उसका सम्पूर्ण जीवन ही एक सुंदर साधना बन जाता है।

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