अजय वर्मा
हरिद्वार। सोमवती अमावस्या के पावन पर्व पर आस्था, श्रद्धा एवं भक्ति का अनुपम संगम उस समय देखने को मिला जब कनखल संन्यास रोड स्थित कृष्ण निवास आश्रम में जोरावरपुरा हनुमानगढ़ (राजस्थान) से प्रातःस्मरणीय सद्गुरुदेव श्री श्री 1008 महंत स्वामी मंगलानंद जी महाराज की परम पावन कृपा से विशाल संत भंडारे का भव्य आयोज किया गया। इस अवसर पर प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर 1008 परम पूज्य गिरधर गिरी जी महाराज का भी पतित पावन सानिध्य प्राप्त हुआ इस अवसर पर देश के विभिन्न क्षेत्रों से संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर गुरु महिमा का गुणगान किया तथा प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
कार्यक्रम में उपस्थित युवा भामाशाह श्री राजेश चौधरी (जयपुर) ने अपने उद्बोधन में कहा कि सतगुरु इस पृथ्वी लोक पर ज्ञान का दिव्य प्रकाश फैलाकर भक्तों के जीवन को नई दिशा प्रदान करते हैं। वे अज्ञान के अंधकार को दूर कर आत्मकल्याण एवं मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु कृपा से ही मनुष्य जीवन सफल एवं सार्थक बनता है।
इस अवसर पर प्रातःस्मरणीय स्वामी राघवानंद गिरी महाराज ने सतगुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि सतगुरु ही सच्चे तारनहार हैं। उनकी कृपा अनंत एवं असीम है। सतगुरु परंपरा सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो युगों-युगों से मानवता को सत्य, प्रेम और धर्म के मार्ग पर अग्रसर करती आ रही है। उन्होंने कहा कि गुरु की शरण में आने वाला साधक भवसागर से पार होकर आध्यात्मिक उन्नति के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त करता है।
महाराज श्री ने आगे कहा कि सतगुरु की भक्ति जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। गुरु का स्मरण, सेवा एवं आज्ञा पालन ही शिष्य के जीवन को दिव्यता से भर देता है। गुरु कृपा से ही आत्मज्ञान का प्रकाश प्रकट होता है और जीव का कल्याण संभव होता है।
भक्ति, श्रद्धा और गुरु महिमा से ओत-प्रोत इस आयोजन में संतों एवं श्रद्धालुओं ने सत्संग का रसास्वादन किया। संपूर्ण वातावरण गुरु भक्ति, हरिनाम संकीर्तन और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा।
