भगवान की भक्ति ही मनुष्य के उद्धार का सच्चा मार्ग है और यह मार्ग मनुष्य को केवल गुरु चरणों की कृपा से ही प्राप्त हो सकता है : स्वामी उर्मिलानंद महाराज

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। भूपतवाला स्थित स्वर्गीय श्री गुरु मोती महंत सेवा आश्रम का पंचम वार्षिक महोत्सव प्रातः स्मरणीय संस्थापक महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 श्री उर्मिलानंद जी महाराज के पावन सानिध्य में अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर विशाल संत समागम एवं संत भंडारे का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें दूर-दूर से आए संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया। कार्यक्रम के दौरान आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण, भजन-कीर्तन और जयघोषों से गुंजायमान रहा। प्रवचन देते हुए स्वामी उर्मिलानंद महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति ही मनुष्य के उद्धार का सच्चा मार्ग है और यह मार्ग मनुष्य को केवल गुरु चरणों की कृपा से ही प्राप्त हो सकता हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही मनुष्य अपने जीवन को सफल और कल्याणमय बना सकता है। इस अवसर पर संतों का सम्मान, प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर पुण्य लाभ प्राप्त किया। इस अवसर पर व्यवस्थापक श्री सुशील जी महाराज ने कहा जिसको गुरु चरणों की रज प्राप्त हो जाएं उसके भाग्य का उदय हो जाता है गुरु ही ईश्वर की ओर जाने वाले मार्ग को प्रदर्शित करते है।

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