अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा के पदाधिकारियों ने सिडकुल मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे श्रमिक नेताओं पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों को पर्याप्त वेतन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा रहा है। सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम भुगतान की मांग पूरी तरह न्यायसंगत है, लेकिन मजदूरों से 12-12 घंटे काम लेने के बावजूद उन्हें उचित पारिश्रमिक नहीं मिल रहा है। महंगाई के इस दौर में कम वेतन के कारण श्रमिकों के सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है, जिससे वे मानसिक दबाव में जीवन यापन कर रहे हैं। राजकिशोर ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की मांग उठाने वाले नेताओं और कर्मचारियों पर प्रबंधन द्वारा मुकदमे दर्ज कराए जा रहे हैं, जिससे मजदूर अपनी जायज मांगें भी खुलकर नहीं रख पा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से श्रमिक नेताओं पर दर्ज मुकदमे तत्काल वापस लेने की मांग की। देवभूमि श्रमिक संगठन के महामंत्री अवधेश कुमार ने कहा कि श्रमिकों की लड़ाई जारी रहेगी और किसी भी प्रकार के दबाव में मजदूर झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन-प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन की मिलीभगत के चलते श्रमिकों पर दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन मजदूर हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इंकलाबी मजदूर केंद्र के केंद्रीय उपाध्यक्ष पंकज ने कहा कि श्रमिक आंदोलन मजदूरों के हितों और सम्मान की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि फैक्ट्री प्रबंधन और श्रम विभाग के अधिकारियों को मजदूरों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम भुगतान और कार्य परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था न होने से श्रमिक परेशान हैं।
