श्री स्वामीनारायण मंदिर में 23वें वार्षिक पाटोत्सव के पावन अवसर पर जनऊ उपनयन संस्कार का भव्य आयोजन किया गया

अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। 12 ब्राह्मण बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ और साथ ही विशाल संत समागम एवं वार्षिक उत्सव का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी हरी चेतनानंद जी महाराज ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि उपनयन संस्कार हमारी प्राचीन भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो मनुष्य को आध्यात्मिक एवं नैतिक जीवन की ओर अग्रसर करता है तथा इसी के माध्यम से गुरुकुल परंपरा में शिक्षा का प्रारंभ होता है और जीवन के प्रथम चरण में ही व्यक्ति को संस्कार, आचार-विचार एवं धर्म के प्रति जागरूक किया जाता है।

प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर स्वामी हरि बल्लभ शास्त्री जी महाराज ने कहा कि स्वामीनारायण आश्रम मंदिर शिक्षा, चिकित्सा, गौसेवा सहित अनेक जनकल्याणकारी कार्यों में निरंतर समर्पित भाव से सेवा करते हुए भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार विश्वभर में कर रहा है, साथ ही उन्होंने गुरु महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गुरु ही मनुष्य को ईश्वर से मिलाते हैं, ज्ञान प्रदान करते हैं और जीवन रूपी भवसागर से पार लगाने वाले सच्चे मार्गदर्शक होते हैं, गुरु से बढ़कर इस संसार में कोई शिक्षक नहीं है और संतों की सेवा से ही मनुष्य का जीवन धन्य हो जाता है। इस पावन अवसर पर परम पूज्य बाबा हठयोगी जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी राम मुनि जी महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी विवेकानंद जी महाराज, श्री महंत रवि देव जी महाराज, महंत दिनेश दास जी महाराज, महंत गणेश दास जी महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज श्याम गिरी महाराज सहित अनेक संत महापुरुषों ने गुरु भक्ति एवं ईश्वर भक्ति पर अपने प्रेरणादायक विचार प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।

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