डा हर्षिता महाराज तथा साध्वी कौशिका नाथ और संदीप नाथ महाराज बनाए गये महामंडलेश्वर

अजय वर्मा

हरिद्वार। पावन आश्रम में आज आयोजित महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह आध्यात्मिक गरिमा, सनातन परंपरा और गुरु-शिष्य मर्यादा का एक अत्यंत दिव्य एवं ऐतिहासिक अवसर बनकर सामने आया। इस पुण्य अवसर पर डॉ हर्षिता नाथ भास्कर जी महाराज साध्वी कोशिका नाथ और संदीपन नाथ जी को विधिवत मंत्रोच्चार, वैदिक अनुष्ठान और संत समाज की साक्षी में महामंडलेश्वर पद से विभूषित किया गया। इस सर्वोच्च आध्यात्मिक पद पर प्रतिष्ठित किया गया। संत समाज के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय रहा। यह समारोह केवल पद अलंकरण तक सीमित नहीं था, बल्कि यह सनातन धर्म की जीवंत परंपराओं, आध्यात्मिक उत्तरदायित्वों और धर्म ध्वजा को विश्व पटल पर ऊंचा रखने के संकल्प का भी प्रतीक था।

इस पावन अवसर पर अपने उद्बोधन में प्रातः स्मरणीय परमात्मा स्वरूप अखाड़े के अध्यक्ष श्री संजीवन नाथ महाराज ने अत्यंत प्रेरणादायी विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु श्री गोरखनाथ जी की अखंड परंपरा सम्पूर्ण विश्व में सनातन धर्म की पताका को निरंतर फहरा रही है। उन्होंने कहा कि गुरु श्री गोरखनाथ भगवान द्वारा दिखाया गया मार्ग केवल साधना और तपस्या का मार्ग नहीं, बल्कि मानवता, धर्म, सेवा और आध्यात्मिक उत्थान का पथ है। इसी पथ पर चलते हुए अखाड़ा आज विश्वभर में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उनके विचारों ने उपस्थित साधु-संतों, श्रद्धालुओं और समाज के सभी वर्गों में नई ऊर्जा और धर्म के प्रति समर्पण का भाव जागृत किया।महामंडलेश्वर पद केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि एक महान उत्तरदायित्व है। यह पद उस साधक को प्रदान किया जाता है जिसने अपने जीवन को धर्म, साधना, सेवा और समाज कल्याण के लिए समर्पित किया हो। इस पद से विभूषित किया जाना उनके आध्यात्मिक व्यक्तित्व, तप, त्याग और समाज के प्रति उनके योगदान का प्रमाण है। यह सम्मान उनके लिए ही नहीं, बल्कि उनके अनुयायियों और समस्त संत समाज के लिए गौरव का क्षण है।हरिद्वार की पवित्र भूमि सदैव से ऋषियों, मुनियों और संतों की तपोभूमि रही है। कनखल स्थित यह आश्रम भी उसी आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है, जहां धर्म, साधना और संस्कृति की ज्योति निरंतर प्रज्वलित रहती है। ऐसे पावन स्थल पर संपन्न यह पट्टाभिषेक समारोह सनातन धर्म की समृद्ध परंपराओं को नई दिशा देने वाला सिद्ध हुआ। वैदिक मंत्रों की गूंज, संतों के आशीर्वचन और भक्तों की श्रद्धा ने पूरे वातावरण को दिव्यता से परिपूर्ण कर दिया।आज के समय में जब समाज अनेक प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहा है, ऐसे आध्यात्मिक आयोजन लोगों को अपनी संस्कृति और मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। यह समारोह इस बात का संदेश देता है कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक महान शैली है, जो सत्य, करुणा,सेवा,अनुशासन और आत्मोन्नति का मार्ग दिखाती है। गुरु परंपरा का सम्मान औरयोग्य संतों का सम्मानित होना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।निस्संदेह, यह पट्टाभिषेक समारोह सनातन धर्म की महिमा, गुरु गोरखनाथ परंपरा की गौरवशाली विरासत और धर्म प्रचार के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने वाला एक अविस्मरणीय अध्याय बन गया है। यह आयोजन आने वाले समय में धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार में एक नई प्रेरणा के रूप में स्मरण कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद धर्म यात्रा के पदाधिकारी श्री मनोज चौहान महंत बड़ा उदासीन अखाड़ा से श्री मुरली दास के साथ-साथ पूजा सत्कर्म संपन्न कराने में श्री भुवन जोशी जी की विशेष महत्वपूर्ण भूमिका रही उन्होंने पूजा पाठ की विधि संपन्न कराई इस अवसर पर सैकड़ो संत महापुरुष तथा ब्राह्मणों ने मंत्रो उच्चारण के साथ कार्यक्रम शुरू किया तथा सनातन धर्म की पता का फहराते हुए भारत माता की जयकारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ गुरु श्री गोरखनाथ अलख अखाड़े द्वारा महामंडलेश्वर साई मां नाथ महाराज श्री अरुण नाथ महाराज की प्रेरणा से अखाड़े द्वारा आज के महामंडलेश्वर बनाये गये।

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