अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। पवित्र स्थल सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि इस स्थान का संबंध सतयुग काल से है और यहां की पावन भूमि में भगवान भोलेनाथ की दिव्य कृपा सदा विद्यमान रहती है। इस तपोभूमि पर समय-समय पर अनेक चमत्कारी और प्राचीन दृष्टांत देखने को मिलते रहे हैं, जिनसे इस स्थान की आध्यात्मिक गरिमा और भी अधिक बढ़ जाती है। मंदिर परिसर और उसके आसपास की भूमि में जब-जब खुदाई का कार्य हुआ है, तब अनेक प्राचीन मूर्तियां, पवित्र कुंडियां तथा अन्य ऐतिहासिक वस्तुएं प्राप्त हुई हैं, जो इस स्थान की प्राचीनता और आध्यात्मिक महत्व को प्रमाणित करती हैं। इन दुर्लभ और प्राचीन अवशेषों की गंभीरता को देखते हुए पुरातत्व विभाग भी समय-समय पर यहां की तहकीकात और अध्ययन कर रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह स्थल केवल आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।इस पावन तपोस्थली का संबंध अनेक महान संतों और तपस्वियों की साधना से भी जुड़ा हुआ है। ब्रह्मलीन स्वामी श्री मस्त राम जी महाराज ने इस दिव्य भूमि पर लंबे समय तक कठोर तपस्या और सेवा कर इस स्थान की आध्यात्मिक ऊर्जा को और अधिक प्रखर बनाया। उनके साथ ही ब्रह्मलीन बाबा संतराम जी महाराज और ब्रह्मलीन बाबा संदीप शर्मा जी महाराज ने भी इस तपोस्थली को अपनी साधना और सेवा से पवित्र किया। इन महान संतों की तपस्या, त्याग और भक्ति के कारण यह स्थान आज भी साधना और आध्यात्मिक शांति का केंद्र बना हुआ है, जहां आने वाला हर श्रद्धालु एक विशेष दिव्य अनुभूति का अनुभव करता है।वर्तमान समय में इस पवित्र मंदिर की सेवा और व्यवस्था उनके उत्तराधिकारी महंत प्रबंधक पंडित देवांश शर्मा के मार्गदर्शन में संचालित हो रही है, वहीं ट्रस्ट की मुख्य संचालिका श्रीमती पूनम शर्मा भी पूरे समर्पण और श्रद्धा के साथ मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन कर रही हैं। दोनों ही मिलकर मंदिर की परंपराओं को बनाए रखते हुए आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा में निरंतर लगे हुए हैं। दूर-दूर से आने वाले भक्तों को यहां पर धार्मिक वातावरण, आध्यात्मिक शांति और सच्ची भक्ति का अनुभव होता है। मंदिर में आने वाला प्रत्येक भक्त स्वयं को भगवान शिव की कृपा से अभिभूत महसूस करता है और अपने जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाने की आशा लेकर यहां आता है।यह तपोस्थली प्राचीन काल से ही भक्तों की अटूट आस्था और विश्वास का केंद्र रही है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां आकर भगवान भोलेनाथ, माता पार्वती और भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना करता है, उसकी हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। अनेक भक्तों ने यहां आकर अपने जीवन की समस्याओं से मुक्ति पाई है और भगवान की कृपा से सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त की है। इस कारण यह पावन धाम श्रद्धालुओं के लिए केवल एक मंदिर ही नहीं बल्कि आस्था, विश्वास और चमत्कारों का जीवंत केंद्र बन चुकाहैहालांकिइतनीप्राचीनता,आध्यात्मिक महत्व और ऐतिहासिक प्रमाण होने के बावजूद यह पावन स्थल आज भी सरकारी विकास और सुविधाओं से काफी हद तक उपेक्षित है। यदि सरकार और संबंधित विभाग इस स्थान के महत्व को समझते हुए इसके संरक्षण और विकास की दिशा में गंभीर प्रयास करें तो यह स्थल न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि पर्यटन और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में भी देश-विदेश में प्रसिद्ध हो सकता है। यहां मूलभूत सुविधाओं, रास्तों, संरक्षण कार्यों और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है, जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु इस पवित्र धाम के दर्शन कर सकें और इसकी महिमा से अवगत हो सकें।फिर भी भक्तों की आस्था और संतों की तपस्या की शक्ति के कारण यह पवित्र स्थल आज भी अपनी दिव्यता और आध्यात्मिक आभा को बनाए हुए है। यहां की पावन भूमि, मंदिर की शांति, और भगवान शिव की कृपा हर आने वाले भक्त के हृदय को भक्ति और विश्वास से भर देती है। यही कारण है कि श्री कुंडी कोटेश्वर महादेव मंदिर आज भी भक्तों के लिए आस्था, भक्ति और दिव्य अनुभूति का एक अद्वितीय केंद्र बना हुआ है, जहां भगवान भोलेनाथ की कृपा से हर भक्त की झोली खुशियों और आशीर्वाद से भर जाती है।
