गुरु इस पृथ्वी लोक पर हमारे मार्गदर्शन हेतु ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में अवतरित होते हैं : श्री राम मुनि महाराज

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। खड़खड़ी स्थित प्रसिद्ध श्री संत मंडल आश्रम में गुरु भगवान प्रातः स्मरणीय ब्रह्मलीन आचार्य महामंडलेश्वर जगदीश मुनि जी महाराज का 15 वा निर्वाण दिवस ज्ञान तथा त्याग की अखंड मूर्ति प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान महामंडलेश्वर परम पूज्य श्री राम मुनि जी महाराज के पावन सानिध्य में बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ हजारों संत महापुरुषों तथा भक्तजनों की गरिमा मय उपस्थित के बीच आयोजित संत समागम को संबोधित करते हुए प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर श्री राम मुनि जी महाराज ने कहागुरु इस पृथ्वी लोक पर साक्षात भगवान की प्रतिमूर्ति के रूप में अवतरित होते हैं, ऐसा हमारे धर्मग्रंथों, परंपराओं और संत महापुरुषों ने सदैव कहा है। गुरु केवल एक शिक्षक नहीं होते, वे ईश्वर की कृपा का जीवंत स्वरूप होते हैं जो मानव जीवन को अज्ञान, मोह और भ्रम से निकालकर सत्य, ज्ञान और प्रकाश की ओर ले जाते हैं। जब संसार में मनुष्य अपने जीवन के उद्देश्य को भूलकर भटकने लगता है, तब गुरु ही उसे उसके वास्तविक स्वरूप का बोध कराते हैं। वे उस दीपक के समान हैं जो स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है। गुरु का अस्तित्व इस धरती पर ईश्वर की उपस्थिति का अनुभव कराता है, क्योंकि वे बिना किसी स्वार्थ के अपने शिष्यों के कल्याण के लिए समर्पित रहते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि गुरु ब्रह्मा हैं जो ज्ञान का सृजन करते हैं, गुरु विष्णु हैं जो उस ज्ञान का पालन और संरक्षण करते हैं, और गुरु महेश हैं जो अज्ञान और दोषों का संहार करते हैं। इस प्रकार गुरु में त्रिदेव का समावेश माना गया है। जब शिष्य सच्चे मन से गुरु की शरण में जाता है, तब उसके जीवन में अद्भुत परिवर्तन आता है। गुरु उसे केवल बाहरी संसार का ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि आत्मा की गहराइयों में छिपे सत्य से भी परिचित कराते हैं। वे सिखाते हैं कि ईश्वर बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर ही विद्यमान है, और उसे पाने का मार्ग सदाचार, संयम, सेवा और साधना से होकर जाता है। महामंडलेश्वर स्वामी हरी चेतनानंद महाराज ने कहा गुरु शिष्य के मन को शुद्ध करते हैं, उसके भीतर से अहंकार को दूर करते हैं और उसमें प्रेम, करुणा तथा विनम्रता का संचार करते हैं। जिस प्रकार सूर्य के उदय होते ही अंधकार स्वयं नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार गुरु के ज्ञान रूपी प्रकाश से अज्ञान का नाश हो जाता है। महामंडलेश्वर श्री रूपेंद्र प्रकाश महाराज ने कहागुरु का आशीर्वाद शिष्य के लिए रक्षा कवच के समान होता है, जो उसे विपरीत परिस्थितियों में भी संभाले रखता है। इतिहास में अनेक संतों और महापुरुषों ने अपने गुरु की कृपा से ही महानता प्राप्त की। परम पूज्य स्वामी भगवत स्वरूप महाराज ने कहागुरु का स्थान माता-पिता से भी ऊँचा माना गया है, क्योंकि वे हमें केवल सांसारिक जीवन ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जीवन का मार्ग भी दिखाते हैं। सच्चा गुरु वही है जो शिष्य को अपने ऊपर निर्भर न बनाकर उसे आत्मनिर्भर और आत्मज्ञानी बनाता है। वह शिष्य को सत्य का मार्ग दिखाकर उसे स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। स्वामी राघवेंद्र दास महाराज ने कहागुरु का हृदय विशाल और करुणामय होता है। वे अपने शिष्य की भूलों को क्षमा करते हुए उसे सुधारने का अवसर देते हैं। गुरु की दृष्टि में सभी शिष्य समान होते हैं, क्योंकि वे प्रत्येक में ईश्वर का अंश देखते हैं। महामंडलेश्वर श्री चिद्धविलासा नंद महाराज नेकहागुरु की महिमा अनंत और अवर्णनीय है। उनके चरणों में श्रद्धा और समर्पण रखने से जीवन में शांति, संतोष और सफलता प्राप्त होती है। गुरु इस पृथ्वी लोक पर साक्षात भगवान की प्रतिमूर्ति हैं, क्योंकि वे हमें ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाते हैं और हमारे जीवन को अर्थपूर्ण बनाते हैं। अतः हमें सदैव अपने गुरु का आदर, सम्मान और सेवा करनी चाहिए तथा उनके उपदेशों का पालन करते हुए अपने जीवन को पवित्र, उज्ज्वल और सफल बनाना चाहिए। श्री महंत विष्णु दास महाराज ने कहा मनुष्य गुरु के मार्गदर्शन के बिना ईश्वर को प्राप्त नहीं कर सकता इसलिए गुरु का ज्ञान और गुरु का मार्गदर्शन सर्वोपरि है इस अवसर पर श्री महन्त सुतीक्ष्ण मुनि महाराज सचिव महंत गोविंद दास महाराज महंत दिनेश दास महाराज महंत केशवानंद महाराज महंत मोहन सिंह महाराज महंत रघुवीर दास महाराज महंत सूर्यांश मुनि महाराज महंत श्याम मुनि महाराज सहित अनेको महापुरुषों ने अपने श्री मुख से ज्ञान की गंगा प्रवाहित की तथा आयोजित विशाल भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया।

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