अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। एकादश रूद्र पीठ भारत माता पुरम हरिद्वार में वार्षिक महोत्सव यज्ञ श्रीमद् भागवत कथा व अखिल भारतीय आध्यात्मिक कवि सम्मेलन में कथा व्यास महामंडलेश्वर राजगुरु स्वामी संतोष आनंद सरस्वती(संतोष गुरुजी) महाराज जी के श्रीमुख से प्रस्फुटित श्रीमद् भागवत कथा का अमृतमय प्रवाह जब आरंभ हुआ तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं अयोध्या की पावन स्मृतियाँ उस स्थल पर अवतरित हो गई हों। महाराज जी ने श्रीराम के जीवन चरित्र का ऐसा मार्मिक, ओजस्वी और भावपूर्ण वर्णन किया कि उपस्थित श्रद्धालु कभी हर्ष से पुलकित हुए, कभी करुणा से द्रवित हुए और कभी आत्मचिंतन में लीन हो गए।

कथा के प्रत्येक प्रसंग—चाहे वह श्रीराम जन्मोत्सव का उल्लास हो, वनवास का त्याग हो, केवट प्रसंग की विनम्रता हो या भरत मिलाप का अद्वितीय भ्रातृ प्रेम—सबने श्रोताओं के अंतर्मन को झकझोर दिया। एक अत्यंत सुंदर दृष्टांत प्रस्तुत करते हुए महाराज जी ने कहा कि जैसे सूर्य उदित होते ही अंधकार स्वतः दूर हो जाता है, उसी प्रकार श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करते ही मनुष्य के जीवन का अज्ञान, मोह और विकार नष्ट हो जाते हैं; जैसे गंगा में स्नान करने से शरीर शुद्ध होता है, वैसे ही श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से आत्मा निर्मल हो जाती है। उन्होंने समझाया कि मनुष्य का जीवन एक नाव के समान है, संसार सागर के समान और श्रीमद् भागवत कथा का नाम उस नाव की पतवार के समान है, जो जीवन को सही दिशा देता है; यदि पतवार सुदृढ़ हो तो तूफान भी मार्ग नहीं रोक सकता। इस पावन आयोजन में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का रसपान किया, भजन-कीर्तन से पूरा एकादश रुद्र पीठ श्रीराममय हो उठा और वातावरण में ‘सीताराम’ के उद्घोष गूंजते रहे। इस अवसर पर अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा गुरु जी समाजसेवी, सचिव श्री जितेंद्र शर्मा जी रजिस्टर, संयोजक श्री धर्मेंद्र शर्मा जी डिप्टी मैनेजर, संचालक श्री राम लखन शर्मा जीअंकित उपस्थित रहे। व इस अवसर पर साधु संतों व भक्तों ने भोजन भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
