अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। त्रिपुरा योग आश्रम में माघ पूर्णिमा के बारे में बताते हुए श्री हेम जोशी ने कहामाघ पूर्णिमा हिन्दू धर्म में अत्यन्त पावन एवं पुण्यदायी पर्व मानी जाती है। यह दिन माघ मास की पूर्णिमा तिथि को आता है और इसका विशेष सम्बन्ध स्नान, दान तथा साधना से है। मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और मनुष्य को पुण्य की प्राप्ति होती है। गंगा, यमुना, सरस्वती जैसी पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व बताया गया है, क्योंकि माघ पूर्णिमा के दिन देवताओं का निवास जल में माना जाता है। माघ पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व भी अत्यन्त गहरा है। इस दिन व्रत, जप, तप और ध्यान करने से आत्मशुद्धि होती है
तथा मन में सात्त्विक भावनाओं का विकास होता है। दान का भी विशेष महत्व है; अन्न, वस्त्र, तिल, घी तथा धन का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साधु-संतों की सेवा और ब्राह्मणों को भोजन कराना अत्यन्त फलदायी माना गया है। इस प्रकार माघ पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और मानवता के कल्याण का संदेश देने वाला पावन अवसर है। यह पर्व हमें संयम, दया, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है तथा जीवन को पवित्र और सार्थक बनाने का अनुपम अवसर प्रदान करता है।
