अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
- हरिद्वार। निर्मला छावनी स्थित भगवान रविदास आश्रम में रविदास जयंती बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ मनाई गई इस अवसर पर बोलते हुए पूर्व बार अध्यक्ष श्री सुशील कुमार ने कहाभगवान श्री रविदास जी महाराज भारतीय संत परंपरा के महान संत, समाज सुधारक और भक्त कवि थे। उनका जन्म लगभग पंद्रहवीं शताब्दी में काशी नगरी में एक साधारण परिवार में हुआ। उन्होंने अपने जीवन में भक्ति, समानता और मानवता का संदेश दिया। संत रविदास जी का मानना था कि ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग प्रेम, करुणा और सच्चे कर्मों से होकर जाता है, न कि जाति, ऊँच-नीच या बाहरी आडंबरों से। उन्होंने समाज में फैली जातिवाद, छुआछूत और भेदभाव जैसी कुरीतियों का दृढ़ता से विरोध किया और सभी मनुष्यों को समान बताया। संत रविदास जी की वाणी अत्यंत सरल, प्रभावशाली और भावपूर्ण थी। उनके भजन और पद आज भी गुरु ग्रंथ साहिब सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों में सम्मिलित हैं। “मन चंगा तो कठौती में गंगा” जैसे उनके वचन आज भी लोगों को आत्मशुद्धि और सच्चाई का मार्ग दिखाते हैं। उनकी रचनाओं में ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति, समाज के प्रति करुणा और मानव जीवन की सच्ची व्याख्या मिलती है। उन्होंने कर्म को ही सच्ची पूजा बताया और मानव सेवा को ईश्वर सेवा के समान माना। इस अवसर पर बोलते हुए श्री लकी जी ने कहा
भगवान श्री रविदास जी महाराज का जीवन त्याग, साधना और सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने अपने विचारों से न केवल अपने समय को, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी दिशा दी। उनकी जयंती हमें यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति वही है जो मानव को मानव से जोड़ती है, प्रेम और समानता का भाव जगाती है तथा समाज को न्याय और सद्भाव की ओर ले जाती है। इस अवसर पर बोलते हुए श्रीपाल सिंह ने कहासंत रविदास जी महाराज का जीवन और उपदेश सदैव मानवता के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे। श्री टिंकू ने कहा भगवान रविदास हमारे हृदय में वास करते हैं हम उनकी दिखाई राह पर चलते हुए अपने जीवन को सार्थक कर रहे हैं
