अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। विशाल शोभा यात्रा श्रवण नाथ नगर के गुरु श्री राम सेवक उछाली आश्रम से शुरू होकर मुख्य मार्गो से होते हुए श्री रामानंद आश्रम पहुंची इस अवसर पर बोलते हुए अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पंचायती श्री महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्री महंत रवींद्र पुरी जी महाराज ने कहाजगतगुरु श्री रामानंदाचार्य जी भारतीय भक्ति आंदोलन के अद्वितीय स्तंभ थे। उनका जीवन भक्ति, साधना और समाज सेवा का अनमोल उदाहरण है। रामानंदाचार्य जी का जन्म 14वीं शताब्दी में हुआ था और उन्होंने भक्ति मार्ग को सरल और आम जन तक पहुँचाने का काम किया। वे जाति, धर्म या सामाजिक स्थिति की परवाह किए बिना सभी के लिए भक्ति और आध्यात्मिकता का संदेश लेकर आए। श्री सुदर्शन आश्रम अखाड़े के परमाध्यक्ष
श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने कहां जगतगुरु श्री
रामानंदाचार्य जी के जीवन का मूल संदेश “रामभक्ति” था। उनका मानना था कि भगवान श्रीराम की भक्ति में ही जीवन का सबसे बड़ा सुख और मोक्ष निहित है। उन्होंने लोगों को अहंकार, द्वेष और सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर प्रेम, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उनके भजनों और शिक्षाओं में यही भाव साफ दिखाई देता है कि भक्ति के मार्ग पर सरलता और सच्चाई सबसे महत्वपूर्ण हैं।
जगतगुरु रामानंदाचार्य जी ने संत समागम और प्रवचन के माध्यम से आम जनता को आध्यात्मिक जीवन की ओर आकर्षित किया। वे न केवल गुरु थे बल्कि समाज सुधारक भी थे। उन्होंने शिक्षा और भक्ति को जीवन का आधार बनाने की दिशा में कार्य किया। उनके शिष्यों में गुरु तुकाराम, सन्त नामदेव, और संत सूरदास जैसे महान संत हुए, जिन्होंने उनके संदेश को आगे बढ़ाया और लोकभक्ति साहित्य में अमूल्य योगदान दिया।
आज उनकी जयंती के अवसर पर हम सभी उनके आदर्शों को अपनाकर अपने जीवन में सत्य, भक्ति, करुणा और प्रेम को स्थान दें। यह दिन हमें याद दिलाता है कि सच्चा आध्यात्मिक मार्ग केवल नियम और रीति-रिवाजों में नहीं, बल्कि मन की शुद्धि, सेवा भाव और ईश्वर भक्ति में निहित है।
आइए हम सब जगतगुरु श्री रामानंदाचार्य जी की शिक्षाओं को आत्मसात करें और उनके मार्ग पर चलकर समाज और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएँ। इस अवसर पर बाबा हठ योगी महाराज श्री महंत सूरज दास महाराज श्री महंत रघुवीर दास महाराज महंत जय रामदास महाराज महंत प्रमोद दास महाराज श्री महंत विष्णु दास महाराज महंत सुतीक्ष्ण मुनि महाराज महंत प्रेमदास महाराज स्वामी सूरज दास महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे।
