तपस्वी ब्रह्मनिष्ठ संत सदगुरु श्री श्री टाट वाले बाबा जी के महाराज की स्मृति में 36 वें वार्षिक समारोह में आयोजित वेदान्त महोत्सव का शुभारंभ

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। श्री गुरु महाराज की आरती वंदन से किया गया गुलरवाला से आई जगदीशजी महाराज की अनन्य भक्ता सुश्री महेशी देवी ने श्री रामचन्द्र जी महाराज और अपनी संगत के साथ बाबाजी के श्री चरणों में एक भक्तिपूर्ण भजन गाकर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए । बिलकेश्वर कॉलोनी से आई अनन्य भक्ता श्रद्धेय माता कृष्णामई ने श्री गुरु चरणों में अपने संस्मरण सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष प्रस्तुत किया । परम पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री हरि चेतनानंद जी महाराज ने कहा कि साधन से बात नहीं होती अगर साधन से बात होती तो व्यक्ति अपने मन को शांत करने के लिए दर दर भटकता नहीं । मन की खुराक है संकल्प और विकल्प ।फिर भी आप स्वस्थ नहीं हो अतः आप इनसे मुक्त हो जाओ ।इसका निरंतर अभ्यास करो कि मैं शरीर नहीं हूं,मैं मन नहीं,,मै इन्द्रिय नहीं , देखकर नहीं देखना , कहां बैठना है कहां नहीं बैठना ,यह मनु स्मृति है।।हमारी तृष्णा तरुण है ,इन्द्रियों को प्रचुर मात्रा में भोग देना ,,अग्नि में आहुति देने के समान है ।आप कहिए मै बुद्धि हूं,अर्थात बुद्धि है तो ज्ञान है।

विषय और वस्तु रहने तक ही आनंद रहता है।

ज्ञानियों के मोहल्ले में मौत नहीं होती वहां केवल परिवर्तन होता है । तू जन्मने वाला नहीं , तू मरने वाला नहीं , तू अजर अमर अविनाशी है। परम पूज्य दिनेश दास जी महाराज, परमाध्यक्ष श्री राम निवास आश्रम जी द्वारा गुरु चरणों में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए एक बहुत ही सुंदर भाव पूर्ण भजन प्रस्तुत कर गुरु महिमा का बखान किया ।” जहां ले चलोगे वही मै चलूंगा जिस हाल में रखोगे ,उसमें ही खुश रहूंगा गुरु के बिना हमारा कोई भी कार्य संभव नहीं होता,अर्थात गुरु के बिना जीवन अंधकारमय है,, अंधकार को दूर करने का कार्य गुरु ही प्रशस्त करते हैं। गुरु का दर्शन मात्र ही तीर्थ का दर्शन है। हम सब भाग्यशाली हैं कि हम ब्रह्मलीन श्री श्री टाट वाले बाबा जी महाराज के 36वे स्मृति समारोह के श्री चरणों में उनके समाधि स्थल पर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं।

टाट वाले बाबा जी महाराज के अनन्य भक्त स्वामी श्री श्री विजयानन्द जी महाराज ने श्री गुरु चरणों में अपने श्रद्धा सुमन अर्पण करते हुए कहा कि गुरु जी का कहा हुआ एक एक शब्द हमे अभिभूत कर बाबा जी ने कहा कि भक्त तू सारा कार्य नारायण नारायण बोलकर करा कर।। आज उनकी कृपा ऐसी परिलक्षित हो रही है कि नारायण नारायण बोलने की ही आदत बन गई है ।

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