महंत जसविंदर सिंह सोढ़ी महाराज की पुण्यतिथी श्रद्धापूर्वक मनायी गयी

हरिद्वार । इस अवसर पर श्री गुरु ग्रंथ साहब के अखंड पाठ की अरदास की गई और भोग लगाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि गुरु अमरदास ने तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण किया। उन्होंने कनखल स्थित सती घाट पर तपस्या की और सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीति को बंद कराया। सभी को गुरू अमरदास महाराज के दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए मानव सेवा के लिए तत्पर रहना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन करते हुए श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले गुरूओं ने हमेशा समाज का मार्गदर्शन किया। गुरुओं की वाणी हमेशा प्रासंगिक रहेगी। गुरूजनों का दिखाया मार्ग ही कल्याण का मार्ग है। उन्होंने कहा विद्वान संत ब्रह्मलीन महंत जसविंदर सिंह सोढ़ी ने हमेशा समाज के जरूरतमंद वर्ग की सहायता के लिए धर्म के संरक्षण में योगदान दिया। अखाड़े के पूर्व सचिव महंत बलवंत सिंह महाराज ने गुरू अमरदास महाराज एवं ब्रह्मलीन गुरूओं को नमन करते हुए कहा कि अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज के नेतृत्व में 2027 में होने वाला हरिद्वार कंुभ मेला भव्यता के साथ संपन्न होगा। तीजी पातशाही तपस्थल गुरु अमरदास गुरुद्वारा के महंत रंजय सिंह महाराज ने सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि.गुरू अमरदास महान समाज सुधारक थे। गुरु अमरदास महाराज ने अपने जीवनकाल में 22 बार हरिद्वार की यात्रा की और कनखल स्थित सती घाट पर तपस्या कर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अलख जगायी और समाजसेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरूजनों के दिखाए मार्ग पर चलते हुए आश्रम की सेवा संस्कृति को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। बीबी बिनिंदर कौर सोढ़ी ने कहा कि गुरु अमरदास ने सामाजिक समरसता के लिए लंगर प्रथा की शुरुआत की। महंत रंजय सिंह, बीबी विनिंदर कौर सोढ़ी, समाजसेवी अतुल शर्मा व नीरव साहू ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर महंत सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी दिनेश दास, महंत खेमसिंह, संत बलबीर सिंह, महंत जीत सिंह, महंत सूरजदास, महामंडलेश्वर स्वामी अनंतानंद, महंत गुरमाल सिंह, स्वामी चिदविलासानंद, महंत दुर्गादास, स्वामी शिवानंद भारती, स्वामी ऋषि रामकृष्ण, पूर्व राज्यमंत्री डा.संजय पालीवाल, अमृत कौचर, मिंटू पंजवानी सहित सभी तेरह अखाड़ों के संत महंत तथा अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे

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