शेहजार शीतल छाया वरिष्ठ नागरिक हमारे सीनियर सिटीजन हमारे जीवन में कल्पवृक्ष की तरह होते हैं : श्री सुरेश पालगे

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। सिडकुल रोशनाबाद स्थित होटल गार्डेनिया में शेहजार शीतल छाया वरिष्ठनागरिक नेशनल कांफ्रेंस राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत में स्वास्थ्य वृद्धावस्था चुनौतियों का अवसर एवं हमारी सामूहिक जिम्मेदारियां पर एक कार्यक्रम संपन्न हुआ इस अवसर पर बोलते हुए श्री एसके रैना जी ने कहानागरिक हमारे बुज़ुर्ग केवल आयु में बड़े नहीं होते, बल्कि वे अनुभव, संस्कार और जीवन मूल्यों की चलती-फिरती पाठशाला होते हैं। उनका सम्मान करना केवल एक सामाजिक औपचारिकता नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य, हमारा स्वाभिमान और हमारी संस्कृति की पहचान है। जिस समाज में बुज़ुर्गों को आदर मिलता है, वही समाज सच्चे अर्थों में सभ्य और संस्कारित कहलाता है। श्री सुरेश पालगे जी ने कहा बुज़ुर्गों का आशीर्वाद जीवन की सबसे बड़ी पूँजी होता है, क्योंकि उनके अनुभवों में जीवन की कठिन राहों के सरल समाधान छिपे होते हैं।आज के तेज़ रफ्तार जीवन में हम अक्सर अनजाने में अपने बुज़ुर्गों को समय देना भूल जाते हैं, जबकि उन्हें सबसे अधिक आवश्यकता अपनापन, सम्मान और प्रेम की होती है। बुज़ुर्गों को खुश रखने के लिए सबसे पहला और सरल उपाय है—उनकी बातों को ध्यान से सुनना। भले ही उनकी बातें हमें बार-बार कही हुई लगें, पर उनके लिए वही बातें अपने जीवन की अमूल्य धरोहर होती हैं। हमारे बुजुर्ग हमारे लिए कल्पवृक्ष के समान होते हैं हमारे बुजुर्ग हमारे संस्कारों में झलकता हैं हमारे जीवन शैली में उनकी सीख झलकती है हमारे बुजुर्ग हमारा स्वाभिमान होते हैं श्री बीएस श्रीधर ने कहा जब हम अपने बुजुर्गों को ध्यान से सुनते हैं, तो उन्हें यह महसूस होता है कि उनका अस्तित्व आज भी महत्वपूर्ण है।बुज़ुर्गों के सम्मान का एक सुंदर तरीका यह भी है कि घर के छोटे-बड़े निर्णयों में उनकी राय अवश्य ली जाए। इससे उनमें आत्मसम्मान की भावना बनी रहती है और वे स्वयं को परिवार का अभिन्न अंग महसूस करते हैं। उनके अनुभवों का सम्मान करना वास्तव में अपने भविष्य का मार्गदर्शन प्राप्त करना है। श्री सर्वेश गुप्ता जी ने कहा हमें अपने बुजुर्गों की छोटी से छोटी बात को ध्यान में रखना चाहिए उनके जीवन से हमें सीख लेना चाहिए साथ ही, उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना, समय पर दवा दिलाना, संतुलित आहार और हल्की-फुल्की दिनचर्या में सहयोग करना भी सच्चे सम्मान का ही रूप है।बुज़ुर्गों को खुश रखने के लिए उन्हें अकेलापन महसूस न होने देना अत्यंत आवश्यक है। प्रतिदिन कुछ समय उनके साथ बैठकर बातें करना, पुराने किस्से सुनना, उनके पसंदीदा भजन, गीत या कार्यक्रम उनके साथ देखना उनके मन को प्रसन्न करता है। श्री एस के अग्रवाल जी ने कहा समय-समय पर हमें अपने बुजुर्गों को सैर पर ले जाना, पार्क या मंदिर घुमाना उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी होता है। छोटे-छोटे कार्य जैसे उनके साथ चाय पीना, उनके हाथ से बना भोजन सराहना या उनके साथ हँसना भी उनके चेहरे पर मुस्कान ला सकता है।बुज़ुर्गों के प्रति सम्मान केवल शब्दों से नहीं, व्यवहार से प्रकट होता है। उनसे ऊँची आवाज़ में बात न करना, उनके सामने धैर्य रखना और उनकी भावनाओं का आदर करना हमें एक बेहतर इंसान बनाता है। बच्चों को भी बचपन से ही बुज़ुर्गों का आदर करना सिखाना चाहिए, ताकि संस्कार पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते रहें। जब बच्चे अपने दादा-दादी या नाना-नानी का सम्मान करते हैं, तो परिवार में प्रेम और सौहार्द का वातावरण स्वतः बन जाता है। श्री सुरेश पालगे जी द्वारा बुजुर्गों का ध्यान रखने हेतु सुंदर विचार प्रकट किए गए उन्होंने कहा

वास्तव में बुज़ुर्ग हमारे जीवन की जड़ें होते हैं। जिस प्रकार जड़ों के बिना वृक्ष हरा-भरा नहीं रह सकता, उसी प्रकार बुज़ुर्गों के बिना परिवार और समाज का संतुलन अधूरा होता है। उनका सम्मान करना, उन्हें खुश रखना और उनके साथ प्रेमपूर्ण व्यवहार करना न केवल उन्हें सुकून देता है, बल्कि हमारे अपने जीवन को भी संस्कारों और आत्मिक संतोष से भर देता है। बुज़ुर्गों का सम्मान करके ही हम अपने स्वाभिमान और मानवीय मूल्यों की सच्ची रक्षा कर सकते हैं। इस अवसर पर अनेकों प्रबुद्ध अतिथि गण पधारे हुए थे जिन्होंने कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिरकत करते हुए हमारा आज बुजुर्गों तथा हमारे पूर्वजों की देन बताया तथा कहा हम आज उन्हीं के परिश्रम से सफलता के शिखर पर हैं शिक्षित हैं और संपन्न है बुजुर्गों के चरणों में चारों धाम बसते हैं इस अवसर पर बोलते हुए मशहूर से समाजसेवी तथा उद्योगपति श्री जगदीश लाल पाहवा जी ने कहा हमारे बुजुर्ग हमारी हर सच में होते हैं हमारे बुजुर्ग हमारी हर सफलता के पीछे होते हैं हमारे सीनियर सिटीजन हमारा स्वाभिमान होते हैं उन्हीं की देन से हमारे भाग्य का उदय हो सकता है क्योंकि हमारे माता-पिता दादा दादी और पूर्वज हमें पालते हैं खिलाने पिलाते हैं अच्छी शिक्षा देते हैं हमारे जीवन को बनाने के लियेवे अपना सारा जीवन हम पर निछावर कर देते हैं तो बुजुर्ग हमारे सर का ताज है बुजुर्ग हमारा स्वाभिमान है हमारा आज भी वह हैं और हमारा आने वाला कल भी उन्हीं के हाथों बनाया हुआ है इस अवसर पर देश के कोने-कोने से सीनियर सिटीजन पधारे हुए थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!