श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में हुआ संस्कृत सम्भाषण शिविर का समापन

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में आज एक सप्ताह से सञ्चालित संस्कृत सम्भाषण शिविर का समापन किया गया। संस्कृत सम्भाषण शिविर में श्री एम. नरेश भट्ट जी ने छात्रों को सरलता से संस्कृत सम्भाषण करने के उपायों का प्रशिक्षण प्रदान किया। छात्रों ने संस्कृत सम्भाषण शिविर के अनुभवों को बताते हुए कहा कि शिविर के माध्यम से हमें संस्कृत सम्भाषण की कला को सिखने का अवसर मिला है। समापन अवसर पर महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. रवीन्द्र कुमार ने कहा कि संस्कृत भाषा के विकास एवं प्रचार-प्रसार के लिये संस्कृत सम्भाषण की अत्यन्त आवश्यकता है। संस्कृत सम्भाषण में कुशल होने के उपरान्त संस्कृत के शास्त्रों की पङ्क्तियों को समझना भी आसान होता है। निरन्तर संस्कृत के उच्चारण से व्यक्ति के मनो-मस्तिष्क की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। आपने यह भी कहा कि अब महाविद्यालय में समस्त प्राध्यापक और छात्र परस्पर संस्कृत में ही वार्तालाप करेंगे। महाविद्यालयस्थ कार्यालय में संस्कृत के प्राध्यापकों व छात्रों के आवेदन, प्रार्थनापत्र आदि संस्कृत में ही स्वीकार किये जायेंगे। महाविद्यालय का वातावरण संस्कृत में होगा। संस्कृत सम्भाषण करने वाले छात्रों को प्रोत्साहित किया जायेगा। यदि किसी को संस्कृत सम्भाषण में समस्या होती है; तो संस्कृत सम्भाषण के अभ्यास के लिये सप्ताह में अतिरिक्त कक्षाओं का आयोजन किया जायेगा। इस अवसर पर उत्तरक्षेत्रीय रूपक (नाटक) महोत्सव में प्रतिभाग करने वाले छात्रों एवं मार्दर्शकों को भी सम्मानित करते हुए उनको प्रमाण-पत्र वितरित किये गये। इस समापन अवसर पर महाविद्यालय के आधुनिक विषय विभाग की प्रमुख डॉ. आशिमा श्रवण, डॉ. आलोक सेमवाल, डॉ. अङ्कुर कुमार आर्य, श्री शिवदेव आर्य, डॉ. सुमन्त कुमार सिंह, डॉ. प्रमेश कुमार बिजल्वाण, डॉ. श्रीकृष्ण चन्द्र शर्मा, डॉ. अंकुल कर्णवाल, श्री आदित्य प्रकाश, श्री विवेक शुक्ला, योग प्रशिक्षक श्री मनोज कुमार गिरि एवं श्री अतुल मैखुरी सहित महाविद्यालय के शिक्षणेत्तर कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

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