अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। निरंजनी अखाड़ा रोड स्थित गोपाल भवन में श्री श्री 1008 पंडित राम गोपाल शर्मा जी के 116 वे जन्म उत्सव के अवसर पर विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया इस अवसर पर बोलते हुए पंडित राम गोपाल शर्मा जी के परम शिष्य श्री हर प्रसाद झावाल जी महाराज ने कहापंडित श्रीराम गोपाल शर्मा अलवरवाले बाबा जी की महिमा बड़ी ही अपरंपार है। भारत भूमि संतों और महापुरुषों की तपोभूमि रही है। ऐसे ही महान तपस्वी विद्वान संत थे पंडित श्रीराम गोपाल शर्मा जी, जिन्हें श्रद्धा से अलवर वाले बाबा जी कहा जाता है। वे न केवल एक विद्वान पंडित थे, बल्कि सच्चे अर्थों में एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी थे।बाबा जी का जीवन सादगी, सेवा और भक्ति से परिपूर्ण था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ईश्वर की आराधना और मानव कल्याण में समर्पित कर दिया। वे सदा सत्य, अहिंसा और प्रेम के मार्ग पर चलने की शिक्षा देते थे। उनके वचनों में इतनी शक्ति होती थी कि दुखी व्यक्ति को भी शांति और आशा मिल जाती थी।बाबा जी की सबसे बड़ी महिमा यह थी कि वे बिना किसी भेदभाव के सभी को समान दृष्टि से देखते थे। गरीब, अमीर, छोटे-बड़े सभी उनके लिए समान थे। कहा जाता है कि जो भी सच्चे मन से बाबा जी की शरण में गया, उसकी समस्याएँ दूर हुईं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया।पंडित श्रीराम गोपाल शर्मा जी का विश्वास था कि सच्ची भक्ति कर्म और सेवा से जुड़ी होती है। वे लोगों को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहने, बल्कि अच्छे कर्म करने और दूसरों की मदद करने की प्रेरणा देते थे। उनका जीवन स्वयं एक प्रेरणा था आज भी बाबा जी के भक्त पूरे श्रद्धा भाव से उनका स्मरण करते हैं। उनकी शिक्षाएँ आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। बाबा जी की महिमा अनंत है और वे सदैव भक्तों के हृदय में जीवित रहेंगे। लेख:पंडित श्रीराम गोपाल शर्मा अलवरवाले बाबा जी की महिमा भारत भूमि संतों और महापुरुषों की तपोभूमि रही है। ऐसे ही एक महान संत थे पंडित श्रीराम गोपाल शर्मा जी, जिन्हें श्रद्धा से अलवर वाले बाबा जी कहा जाता है। वे न केवल एक विद्वान पंडित थे, बल्कि सच्चे अर्थों में एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी थे।बाबा जी का जीवन सादगी, सेवा और भक्ति से परिपूर्ण था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ईश्वर की आराधना और मानव कल्याण में समर्पित कर दिया। वे सदा सत्य, अहिंसा और प्रेम के मार्ग पर चलने की शिक्षा देते थे। उनके वचनों में इतनी शक्ति होती थी कि दुखी व्यक्ति को भी शांति और आशा मिल जाती थी।बाबा जी की सबसे बड़ी महिमा यह थी कि वे बिना किसी भेदभाव के सभी को समान दृष्टि से देखते थे। गरीब, अमीर, छोटे-बड़े सभी उनके लिए समान थे। कहा जाता है कि जो भी सच्चे मन से बाबा जी की शरण में गया, उसकी समस्याएँ दूर हुईं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया।पंडित श्रीराम गोपाल शर्मा जी का विश्वास था कि सच्ची भक्ति कर्म और सेवा से जुड़ी होती है। वे लोगों को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहने, बल्कि अच्छे कर्म करने और दूसरों की मदद करने की प्रेरणा देते थे। उनका जीवन स्वयं एक प्रेरणा था आज भी बाबा जी के भक्त पूरे श्रद्धा भाव से उनका स्मरण करते हैं। उनकी शिक्षाएँ आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। बाबा जी की महिमा अनंत है और वे सदैव भक्तों के हृदय में जीवित रहेंगे। इस अवसरपर महामंडलेश्वर गंगादास उदासीन महंत सुतीक्ष्ण मुनि महंत सूरज दास महाराज महंत सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित थे इस अवसर पर एक विशाल संत भंडारे का आयोजन हुआ जिसमें सभी ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया कल विशाल शोभा यात्रा निकल जाएगी।
