अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। भूपतवाला भागीरथी नगर स्थित चिन्मय धाम में मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर संत महापुरुषों के श्री मुख से ज्ञान की पावन सरिता का प्रवाह हुआ इस अवसर पर बोलते हुए अनंत विभूषित प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान राष्ट्र संत चिन्मयानंद बापू ने कहामौनी अमावस्या का पर्व और गुप्त नवरात्रि का त्योहार हमारे धर्म और संस्कृति में अत्यंत महत्व रखते हैं। मौनी अमावस्या वह पावन समय है जब संपूर्ण सृष्टि मौन और शांति की छाया में डूब जाती है। यह दिन व्रत, तप, ध्यान और आत्मावलोकन का संदेश देता है। साधक अपने भीतर की गहराई में उतरकर मन और हृदय को शुद्ध करता है, और आस्था की ऊर्जा से आत्मा को पोषण प्रदान करता है। यही अवसर है जब सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर केवल ईश्वर के स्मरण और भक्ति में लीन होना संभव होता है।
गुप्त नवरात्रि की महिमा भी अद्भुत है। यह नौ दिन का पर्व केवल देवी की आराधना ही नहीं, बल्कि अपने भीतर की शक्ति, साहस और धर्म की जागृति का समय भी है। इन नौ रातों में विशेष रूप से साधक अपने हृदय की गहराई में देवी की शक्ति का अनुभव करता है। यह समय कर्म, भक्ति और ध्यान के माध्यम से आत्मशक्ति के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।हरिद्वार के भूपत वाला स्थित चिन्मयानंद धाम इस आध्यात्मिक यात्रा का प्रमुख केंद्र है। यहाँ संत महापुरुषों के श्रीमुख से ज्ञान की सरिता प्रवाहित होती है। उनके शब्द, उनके उपदेश, उनके अनुभव—सब मिलकर श्रोता के हृदय और चेतना को आलोकित करते हैं। वे हमें बताते हैं कि जीवन केवल सांसारिक कर्मों और संघर्षों का नाम नहीं, बल्कि ईश्वर के स्मरण, भक्ति और आत्मा की शुद्धि का एक दिव्य मार्ग है। संतों के वचनों से प्राप्त ज्ञान, हमें न केवल सही मार्ग दिखाता है बल्कि जीवन में संतुलन, धैर्य और साहस की शक्ति भी प्रदान करता है।भगवान राम का नाम इस पावन अवसर की महिमा को और भी बढ़ा देता है। राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो अज्ञान, दुख और पाप को नष्ट कर देता है। राम का नाम जीवन में उजाला भरता है, हृदय को शांति देता है और आत्मा को मुक्त करता है। संतों के अनुसार, राम का नाम किसी मंत्र या साधना से भी अधिक प्रभावशाली है। यही नाम हमारे जीवन में आदर्श, धर्म, प्रेम और करुणा का प्रतीक है। श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा
चिन्मय धाम में इस समय का अनुभव करना एक दिव्य अनुभूति से कम नहीं है। यहाँ संतों के श्रीमुख से ज्ञान की सरिता, मौनी अमावस्या और गुप्त नवरात्रि का पावन वातावरण, और भगवान राम के नाम की महिमा मिलकर साधक के जीवन में आध्यात्मिक जागृति उत्पन्न करते हैं। यह अनुभव न केवल मन और हृदय को शुद्ध करता है, बल्कि जीवन के प्रत्येक कर्म को दिव्य दिशा प्रदान करता है।इस प्रकार, मौनी अमावस्या और गुप्त नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि यह आत्मा की साधना, हृदय की शुद्धि और भगवान राम के नाम के स्मरण का अद्भुत अवसर हैं। चिन्मयानंद धाम में यह पावन अनुभव हमें यह याद दिलाता है कि सच्ची भक्ति, ज्ञान और आत्मा की शांति केवल धार्मिक अनुष्ठानों में नहीं, बल्कि हमारे हृदय और जीवन के प्रत्येक कर्म में छिपी होती है। यही महिमा और यही दिव्यता हमें इस पावन समय की गहराई से जोड़ती है। इस अवसर पर बाबा हठयोगी महाराज महंत रावेद्र बिहारी दास महंत बिहारी शरण महाराज महंत मोहन सिंह महाराज महंत जगजीत सिंह महाराज महंत जयरामदास महाराज महंत सूरज दास महाराज महंत नारायण दास पटवारी महाराज स्वामी अंकित शरण महाराज पार्षद आकाश भाटी स्वामी रवींद्र दास पार्षद विनीत शर्मा पंडित हरि जोशी रामेंद्र बिहारी दास महंत रवींद्र बिहारी दास श्री राघव जी रोहित कपिल मृदुल सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तजन उपस्थित थे मेरठ से पधारी श्रीमती कुसुम शास्त्री जी मेरठ पब्लिक स्कूल की संस्थापिका के माध्यम से मौनी अमावस्या के प्रारूप पर इस विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया आज के दिन अन्न वस्त्र तथा दान करने के साथ-साथ मागंगा तथा पावन नदियों में स्नान का विशेष महत्व है।
