गुरु के मार्गदर्शन के बिना ईश्वर को प्राप्त करना असंभव है गुरु के चरणों में चारों धाम बसते हैं : महंत गणेश दास

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर (भूपतवाला) में आयोजित प्रातः स्मरणीय गुरु भगवान महामंडलेश्वर श्री जानकी दास जी महाराज की द्वितीय पवन पुण्यतिथि के अवसर परइस दिव्य संत समागम का विवरण भक्ति और श्रद्धा से ओतप्रोत रहा। संपूर्ण वातावरण

गुरु महिमा से गुंजायमान हुआ भूपतवाला: श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में विशाल संत समागम और भंडारा संपन्न

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में आज आश्रम के महंत श्री गणेश दास जी महाराज के पावन सानिध्य में अध्यात्म और श्रद्धा का अनूठा समागम देखने को मिला। अवसर था—परमात्मा स्वरूप परम पूज्य गुरुदेव महामंडलेश्वर 1008 श्री जानकी दास जी महाराजकी पुण्यपावन तिथि मंदिर प्रांगण में एक विशाल संत समागम एवं भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर से आए प्रख्यात संतों ने गुरु तत्व की महत्ता पर प्रकाश डाला। महापुरुषों के अमृत वचन: गुरु ही ईश्वर प्राप्ति का द्वार समागम की अध्यक्षता कर रहे जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्री अयोध्या दास जी महाराज ने उपस्थित भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। उन्होंने जोर देकर कहा, “गुरु के बिना मनुष्य भगवान राम के चरणों तक नहीं पहुंच सकता। गुरु ही वह सेतु है जो जीव का साक्षात्कार परमात्मा से कराता है।”

इसी क्रम में श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने गुरु को ईश्वरीय अवतार बताते हुए कहा कि सद्गुरु देव हमारे मार्गदर्शन हेतु ही इस मृत्युलोक पर अवतरित होते हैं। वहीं, महामंडलेश्वर परम पूज्य श्याम दास महाराज ने स्पष्ट किया कि गुरु के मार्गदर्शन के बिना ईश्वर की प्राप्ति असंभव है; वे ही हमारे जीवन को धर्म और कर्म के माध्यम से सार्थक बनाते हैं। जीवन जीने की कला और मुक्ति का मार्ग श्री गोकुलधाम के परमाध्यक्ष प्रातः स्मरणीय महामंडलेश्वर श्री परमेश्वर दास जी महाराज ने गुरु को सच्चा मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा: “गुरुदेव केवल मंत्र नहीं देते, बल्कि वे हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं और ईश्वर तक पहुंचने की वह युक्ति बताते हैं जिससे भवसागर की बाधाएं मिट जाती हैं।” महामंडलेश्वर श्री किशन दास महाराज ने विस्तार से बताया कि गुरुदेव के पास जीवन को सफल करने की ‘युक्ति’ और ‘मुक्ति’ दोनों का मार्ग है। श्री महंत दुर्गा दास महाराज ने यज्ञ और अनुष्ठानों की महत्ता बताते हुए कहा कि गुरुदेव ही हमारे मानव जीवन को सार्थक करने वाले कुंभकार हैं। भवसागर से पार लगाने वाली ‘गुरु-ऊँगली’ समागम में अन्य विद्वान संतों ने भी अपने विचार रखे: महंत प्रहलाद दास महाराज ने एक सुंदर उपमा देते हुए कहा कि गुरुदेव शिष्य की उंगली पकड़कर उसे भवसागर पार करा देते हैं। महंत कन्हैया दास महाराज के अनुसार, गुरु के पावन वचन ही हमारे जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। महंत रामानुज दास महाराज ने कहा कि गुरु का सही मार्गदर्शन ही मानव जीवन का वास्तविक उद्धार कर सकता है।

विशाल भंडारा और अटूट श्रद्धा

संत समागम के पश्चात एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और साधु-संतों ने प्रसाद ग्रहण किया। संपूर्ण मंदिर परिसर ‘जय श्री राम’ और ‘गुरुदेव की जय’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा। इस आयोजन ने न केवल गुरु-शिष्य परंपरा को जीवंत किया, बल्कि समाज को धर्म और नैतिकता के मार्ग पर चलने का संदेश भी दिया। महंत गणेश दास जी महाराज ने कहा गुरु इस पृथ्वी लोक पर ज्ञान की गंगा के रूप में स्थापित है उनके ज्ञान की गंगा में गोते लगाने के बाद मनुष्य जीवन धन्य तथा सार्थक हो जाता है गुरु के चरणों में चारों धाम बसते हैं इस अवसर पर महामंडलेश्वर शिवानन्द महाराजमहंत नारायण दास पटवारी महंत बिहारी शरण महाराज स्वामी अंकित शरण महाराज महंत मस्त गिरी महाराज महंत कन्हैया दास महाराज महंत किशोरी दास महाराज स्वामी हनुमान दास महाराज महंत जयरामदास महाराज कोतवाल कमल मुनि महाराज कोतवाल रामदास महाराज कोतवाल धर्मदास महाराज सहित भारी संख्या में अनेकों आश्रमों से आए संत महापुरुष महंत श्री महंत तथा भक्तजन उपस्थित थे।

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