भारत और नेपाल एक ही संस्कृति का भाग : कोश्यारी

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। श्री प्रेम नगर आश्रम में आज प्रातः काल से ही भक्ति की सुगंधित ध्वनियां उद्घोष कर रही थी आज नेपाल से पधारे श्री हरि कृपा फाऊंडेशन के श्री हरि कृष्ण महाराज के पावन सानिध्य में एक भव्यदिव्या वातावरण के बीच श्रीमद् भागवत कथा के शुभारंभ के अवसर पर उत्तराखंड सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री तथा महाराष्ट्र केपूर्व राज्यपाल श्री भगत सिंह कोसियारी महामंडलेश्वर श्री रूपेंद्र प्रकाश कोठारी महंत श्री राघवेंद्र दास महाराज वरिष्ठ समाजसेवी श्री जगदीश लाल पाहवा निधि राणा उपाध्यक्ष भाजपासहित अनेको गरिमा मय अतिथियों कीउपस्थितियों के बीच कथा व्यास परम विदुषी भागवत आचार्य बाल विदुषी देवी भवानी जी के पावन श्री मुख से कथा का श्रवण कर भक्त जनों ने अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया इस अवसर पर बोलते हुए पूर्व राज्यपाल श्री भगत सिंह कोश्यारी ने कहा भारत नेपाल एक साझी संस्कृति क विरासत है भारत नेपाल भारतवर्ष तथा आसपास के कई अन्य देश इसी संस्कृति का भाग है हमारे अचार विचार और संस्कृति एक होने के साथ-साथ हम एक ही भारत माता की संतान है भारत और नेपाल भले ही दो देश अलग-अलग हो गए हो किंतु हमारी संस्कृति एक है हमारी सोच एक है हमारी विरासत एक और ऐसी श्रीमद् भागवत कथा हमें एकता के सूत्र में बनती है हमारे अंदर उच्च संस्कार अच्छे विचार उत्पन्न करती है और हमें एक करती है हमारा लोक एवं परलोक दोनों सुधार देती है इस अवसर पर बोलते हुए महामंडलेश्वर श्री रूपेंद्र प्रकाश ने कहा यह कथा नहीं एक जीवन कल्याण सुधा रस है जो नेपाल से भारत की धरती पर दोनों देशों के कल्याण हेतु समर्पित है ऐसी पावन कथा हमारे मानव जीवन को कृतार्थ कर देती है ऐसा अवसर पर बोलते हुए वरिष्ठ समाजसेवीश्री जगदीश लाल पाहवा ने कहा हम बड़े भाग्यशाली हैं की नेपाल की धरती से हमारे भारत भूमि हरिद्वार में इतनी पावन कथा का पावन दृष्टांत सुनकर हमारा मानव जीवन धन्य हो रहा है भारत एवं नेपाल एकता के सूत्र में बंध रहे हैं इस अवसर पर बोलते हुए परम पूज्य श्री हरि कृष्ण महाराज ने कहा यह पावन कथा दोनों देशों के संबंधों को प्रगढ़ और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से की जा रही है ताकि संपूर्ण विश्व में शांति की स्थापना हो और भारत-नेपाल एकता के सूत्र में बंध कर संपूर्ण विश्व को सनातन तथा आध्यात्मिक संदेश देकर उसका मार्गदर्शन करते रहे भारत और नेपाल एक ही संस्कृति के दो पहलू हैं हमारी सोच एक है हमारी संस्कृति एक है हमारे देवी देवता एक हैं हमारे अचार विचार एक हैं और हमारे आपस में संबंध एक है इसीलिए हम एक हैं और एकता के सूत्र में बंध कर संपूर्ण विश्व का आध्यात्मिक जगत में मार्गदर्शन करने हेतु सदैव तत्पर श्रीमद् भागवत कथा जीवन कल्याण सुधा रस है जो जीवन में एक बार इस पावन कथा का श्रवण कर लेता है उसका मानव जीवन धन्य और तथा सार्थक हो जाता है इस अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा करते हुए कथा व्यास परम पूज्य बाल विदुषी देवी भवानी ने कहा श्रीमद् भागवत कथा यह वह पावन कथा है जो प्रथम बार पृथ्वी पर इसी पावन नगरी हरिद्वार में सुनाई गई थी श्रीमद् भागवत कथा एक कथा ही नहीं इस मनुष्य जीवन को धन्य तथा कृतार्थ करने वाली पावन त्रिवेणी है अमृत का वह कलश है जो इसे एक बार अपने जीवन में सुन लेता है उसका मानव जीवन पाप रहित हो जाता है और उसके इस पृथ्वी पर आने का उद्देश्य सार्थक हो जाता है इस पावन कथा का आयोजन करने से मनुष्य को सुख शांति और समृद्धि तथा वैभव की प्राप्ति होती है और उसके पितरों का तर्पण हो जाता है श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान का वह अमृत कलश है जो संपूर्ण ग्रंथों तथा पुराणों निचोड़ है जिसमें भगवान श्री नारायण के अनेकों स्वरूपों का भावपूर्ण दिव्य रसपान है जिसने जीवन में दूर से भी एक बार इस कथा का श्रवण कर लिया हो उसका मानव जीवन धन्य तथा सार्थक हो जाता है वह पाप मुक्त हो जाता है श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन का वातावरण और भक्ति की भावना अत्यंत मनोहारी मन को छू जाने वाले पावन वातावरण से परिपूर्ण दिव्य वचनों की वर्षा से भक्त अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ कर रहे थे। इस दिन की शुरुआत से ही भक्तों का मन भगवान के प्रति समर्पण और श्रद्धा में डूबा हुआ थाभगवान के महिमामय जीवन और उनकी लीलाओं की शुरुआत का प्रतीक होता है। इसे सुनने और समझने से मन में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरूकता उत्पन्न होती है। पहला दिन कथा का नींव दिनू होता है, इसलिए इसे विशेष महत्व दिया जाता है। कथा स्थल पर आते ही भक्तों को एक शांत और पवित्र वातावरण मिलता है। आमतौर पर इस दिन मंद प्रकाश और दीपमालाएँ कथा स्थल को सजाती हैं, सुगंधित धूप और फूल वातावरण को शुद्ध और मनोहारी बनाते हैं, और भजन तथा कीर्तन प्रारंभ से ही भक्ति रस में डुबो देते हैं। इस दिन, कथा के प्रारंभ में पुजारी या कथावाचक भगवान की स्तुति करते हुए उनकी महिमा का वर्णन करते हैं। यह केवल कथा सुनाने का माध्यम नहीं, बल्कि मन और आत्मा को भगवान के प्रति मोहित करने का जरिया भी होता है।

प्रथम दिन कथा सुनते समय भक्तों का मन पूर्णतया भगवान में लीन हो जाता है। इस दिन की कथा मुख्यतः भक्ति और समर्पण पर जोर देती है, भगवान श्रीकृष्ण या नारायण के चरित्र और लीलाओं का परिचय देती है और सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर जीवन में सच्ची भक्ति अपनाने की प्रेरणा देती है। भक्त इस दिन कथा के माध्यम से अनुभव करते हैं कि भगवान के नाम का स्मरण, उनकी लीलाओं का स्मरण और उनकी भक्ति ही जीवन का सर्वोच्च आनंद और उद्देश्य है। कथा स्थल पर उपस्थित सभी लोग एक साथ भजन, कीर्तन और कथा सुनने में लीन रहते हैं, जिससे सामूहिक भक्ति की ऊर्जा का अनुभव होता है। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों में भी भगवान के प्रति श्रद्धा और आध्यात्मिक जागरूकता उत्पन्न होती है। यह दिन मन और हृदय को पवित्र बनाता है, जिससे आगे आने वाले दिनों की कथा और अधिक प्रभावशाली बनती है। प्रथम दिन केवल कथा सुनने का दिन नहीं, बल्कि भक्ति और श्रद्धा में डूबने का दिन है। यह दिन हमें यह सिखाता है कि जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य भगवान की भक्ति और उनके आदर्शों का अनुसरण करना है। इस दिन की कथा सुनकर भक्तों का मन शांत, पवित्र और आनंदित हो जाता है इस अवसर पर आशीषमंडल अनिरुद्ध उपाध्याय राणा बहादुरबुटा कमला कुमारी सरदार संदीप सिंह नैयर माता पद्मा देवी उपाध्याय परमेश्वर उपाध्याय शिवानी उपाध्याय दिव्यानंदउपाध्याय नित्यानंद उपाध्याय ज्योति गुरु शेखर शर्मा सुधा राठोर अर्चना भावना सपना पंडित माया देवी रंजीता स्वामी विशेषानंद महाराज सहित भारी संख्या में नेपाल से आये श्रद्धालु भक्तजन तथा स्थानीय नागरिक कथा श्रवण करने हेतु पधारे हुए थे।

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