गुरु ज्ञान की एक ऐसी अमृत वर्षा है जो जीवन को धन्य कर देती है : श्री महंत विश्वापुरी महाराज

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। ठोकर नंबर 5 पर महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट हरिपुर कला के तत्वाधान में 42 वा संत भंडारा परम पूज्य गुरुदेव अनंत विभूषित श्री महंत विश्वापुरी महाराज के पतित पावन सानिध्य में संपन्न हुआ इस अवसर पर बोलते हुए अनंत विभूषित परम पूज्य गुरुदेव श्री महंत विश्वापुरी जी महाराज ने कहामानव जीवन एक यात्रा है—कभी धूप, कभी छाया, कभी आशा, कभी भ्रम। इस जीवन-पथ पर चलने वाला मनुष्य दिशा खोजता रहता है। जब-जब मन अंधकार में खो जाता है, तब एक दिव्य प्रकाश बनकर गुरु हमारे जीवन में उतरते हैं। गुरु का ज्ञान ऐसा अमृत है, जिसकी एक बूँद भी जीवन का रूपांतरण कर देती है।गुरु केवल पढ़ाते ही नहीं—जगाते हैं। वे केवल ज्ञान नहीं देते—जीवन की समझ देते हैं। उनके वचनों में वह शक्ति होती है जो भ्रम को मिटाकरसत्य तक पहुँचा दे।गुरु की वाणी का एक शब्द ऐसा होता है जैसे घने अँधेरे में दीपक जल गया हो।जहाँ मन उलझता है, गुरु वहाँ सरल मार्ग दिखाते हैं।जहाँ शंका होती है, वहाँ गुरु विश्वास का हाथ पकड़ लेते हैं।जहाँ रास्ता खो जाता है, वहाँ गुरु काज्ञान दिशाबनता है। यही कारण है कि शास्त्रों में कहा गया है “गुरु बिना ज्ञान नहीं, और ज्ञान बिना मुक्ति नहीं।”जैसे वर्षा की बूँदें धरती की प्यास बुझाती हैं, वैसे ही गुरु का ज्ञान मन कीथकान मिटाता है।उनके शब्दों में इतनी मधुरता होती है कि सुनते ही मन शांत हो जाता है।उनकी सीख आत्मा को स्पर्श करती है और भीतर सोई हुई अच्छाइयों को जगा देती है। गुरु की वाणी केवल कानों से नहीं हृदय से सुनी जाती है। क्योंकि वह अनुभव की हुई सच्चाई होती है, केवल पढ़ी-पढ़ाई बात नहींगुरु वही नहीं जो तुम्हें किताबें समझाए,सच्चा गुरु वह है जो तुम्हें स्वयं समझा दे। जो तुम्हें उस प्रकाश से मिलाए जो भीतर पहले से मौजूद है। जो तुम्हें यह एहसास दिलाए कि जीवन केवल जीने के लिए नहीं, कुछ बनने केलिए मिला है विनम्रबनाताहै,संयमीबनाताहै,कर्तव्यपरायण बनाता है,आत्मविश्वासी बनाता हैऔर सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक रूप से जागृत करता है|कहा गया है कि गुरु का सान्निध्य ही तीर्थ है।उनके पास बैठना ही ध्यान है।उनकी बातों में ही गंगा सी पवित्रता है। जो व्यक्ति गुरु की कृपा का अधिकारी बन जाता है, उसके जीवन में अज्ञानता के तमस का अंत हो जाता है। उसके जीवन में मंगल ही मंगल होता है।सच में, गुरु का ज्ञान ऐसी अमृत वर्षा है जो जीवन की धरती को उर्वर, पवित्र और ऊर्जा से भरी बना देती है। गुरु के मार्गदर्शन से मनुष्य स्वयं को पहचानता है, अपने मार्ग को समझता है और अपने लक्ष्य तक पहुँचने का साहस प्राप्त करता है। इसलिए कहा गया है “गुरु की कृपा जहाँ हो, वहाँ सब कुछ संभव है।” इस अवसर पर बोलते हुए पंडित श्री राजवीर शर्मा कोषाध्यक्ष महाशक्तिपुंज सेवा ट्रस्ट ने कहा “गुरु ज्ञान की अमृत वर्षा से जीवन धन्य हो जाता है।” गुरु ज्ञान की एक विशाल गंगा के रूप में हम भक्त जनों के बीच हमारे मार्गदर्शन हेतु हमारे कल्याण हेतु उपस्थित रहते हैं इस अवसर साध्वी आरोग्य ज्योति आचार्य बृज किशोर सहित भारी संख्या में संत भक्त उपस्थित थे।

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