भक्ति का अर्थ केवल पूजा-पाठ या धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति पूर्ण श्रद्धा, विश्वास, प्रेम और समर्पण की भावना है : कमलेशानंद महाराज
अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा हरिद्वार। भक्ति मनुष्य के हृदय को निर्मल करती है और उसके भीतर छिपे अहंकार, क्रोध, लोभ,…
