अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार । कनखल स्थित प्रसिद्ध महाकाल भैरव मंदिर में भैरव बाबा की महिमा के बारे में बताते हुए पंडित नवीन कौशिक रानू ने कहा यह दिन भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए अपने क्रोध से काल भैरव का प्रकट किया था। इसलिए इस दिन को काल भैरव जयंती या भैरव अष्टमी कहा जाता है।शिव पुराण के अनुसार, एक बार ब्रह्मा, विष्णु और शिव में यह विवाद हुआ कि सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ देवता कौन है। विवाद बढ़ने पर भगवान शिव के क्रोध से एक तेजस्वी प्रकाश प्रकट हुआ, और उस तेज से भैरव का जन्म हुआ।
भैरव ने ब्रह्मा के अहंकार का नाश कर धर्म की स्थापना की। इस दिन को ही भैरव अष्टमी कहा गया।
भैरव बाबा को न्याय के देवता और धर्म के रक्षक माना जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और उग्र है, लेकिन अपने भक्तों के लिए वे करुणामय और कृपालु हैं।
भैरव अष्टमी के दिन भैरव बाबा की उपासना करने से सभी प्रकार के भय, रोग, शत्रु और पाप दूर हो जाते हैं।यह पर्व विशेष रूप से मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन देशभर के भैरव मंदिरों में भव्य पूजा, भजन, और जागरण का आयोजन किया जाता है।
भैरव अष्टमी के दिन प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण किए जाते हैं।भैरव बाबा के मंदिर में जाकर उनका अभिषेक किया जाता है। उन्हें काले तिल, काले वस्त्र, सरसों के तेल का दीपक, नींबू, नारियल, और फूल अर्पित किए जाते हैं।
भक्त भैरव अष्टक, भैरव चालीसा और काल भैरव स्तोत्र का पाठ करते हैं।भैरव बाबा का वाहन कुत्ता होता है, इसलिए इस दिन काले कुत्तों को भोजन कराना शुभ माना जाता है। यह कर्म भैरव बाबा को अत्यंत प्रिय होता है।
भैरव बाबा के आठ प्रमुख रूपों की उपासना भी इस दिन की जाती है, जिन्हें अष्ट भैरव कहा जाता है —
1. काल भैरव
2. संहार भैरव
3. रुद्र भैरव
4. अनंत भैरव
5. क्रोध भैरव
6. कपाली भैरव
7. भीषण भैरव
8. संहारक भैरव
इन सभी रूपों की आराधना से जीवन में आने वाले संकटों और नकारात्मक शक्तियों का नाश होताहै।भैरव अष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और निर्भयता का संदेश देने वाला दिन है।यह दिन हमें यह सिखाता है कि जीवन में बुराई, अहंकार, और अधर्म का अंत निश्चित है।
भैरव बाबा हमें यह प्रेरणा देते हैं कि सच्चाई के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कभी नहीं डरता, क्योंकि काल भैरव सदैव उसके साथ रहते हैं।भारत में कई प्रमुख भैरव मंदिर हैं जहाँ भैरव अष्टमी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है —
काशी का काल भैरव मंदिर (उत्तर प्रदेश)उज्जैन का काल भैरव मंदिर (मध्यप्रदेश)दिल्ली का भैरव मंदिरजयपुर का भैरवनाथ मंदिरइन स्थानों पर हजारों श्रद्धालु इस दिन दर्शन के लिए उमड़ते हैं और पूरी रातभजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहता है।
भैरव अष्टमी का पर्व हमें भयमुक्त जीवन जीने और सच्चाई का साथ देने की प्रेरणा देता है।
भैरव बाबा की भक्ति से व्यक्ति के जीवन से अंधकार दूर होकर प्रकाश फैलता है।
उनकी कृपा से भक्त के मन में शक्ति, साहस और विवेक का संचार होत है पंडित नवीन कौशिक रानू ने बताया कि मेरे जीवन में महाकाल भैरवनाथ भगवान की अपार कृपा मैंने देखी है मैं एक्सीडेंट में पूरी तरह निशक्त हो गया था कई कई जगह से हड्डी टूट गई थी किंतु भैरव बाबा ने आज आपके सामने स्वस्थ जीवन मुझे प्रदान किया है यह सब उन्हीं की कृपा है भैरव बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं जाता।
