अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार । भूपतवाला स्थित चिन्मयानन्द धाम में परम पूज्य राष्ट्र संत प्रख्यात कथा वाचक श्री चिन्मयानन्द बापू के पावन सानिध्य में आश्रम साकेतवासी महामंडलेश्वर गुरु भगवान राम कुमार दास जी महाराज की पावन स्मृति में तथा स्व श्री ताराचंद शास्त्री जी की पावन स्मृति में मेरठ से पधारी श्रीमती कुसुम शर्मा संस्थापक मेरठ पब्लिक स्कूल द्वारा विशाल संत भंडारे का आयोजन परम पूज्य गुरुदेव राष्ट्र संत श्री चिन्मयानंद बापू जी के पावन सानिध्य में आयोजित किया गया इस अवसर पर बोलते हुए देश के प्रख्यात धर्म मर्मज्ञ कथा व्यास पूज्य चिन्मयानंन्द बापू ने कहासनातन संस्कृति में “राम” केवल एक नाम नहीं—एक शक्ति, एक अनुभूति, और एक आदर्श का प्रकाश है। भगवान श्रीराम का नाम ऐसा दिव्य मंत्र है जो करोड़ों भक्तों के जीवन में आशा, शांति और सद्गुणों का दीपक जलाता है।राम नाम का उच्चारण करते ही मन में एक अलौकिक शांति उतरती है। यह नाम दुखों को हरता है, मन को निर्मल करता है और जीवन में दिशा देने का सामर्थ्य रखता है।
प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है:
“राम नाम अमृत समान, पीयूष सरिता की धारा।”
जिस व्यक्ति ने अपने हृदय में राम नाम का वास कर लिया, उसके जीवन में अंधकार कभी स्थायी नहीं रह सकता। यह नाम मनुष्य को भय, निराशा और मानसिक कमजोरी से उबारकर उसे शक्ति और साहस प्रदान करता है।कहते हैं कि संसार में असंख्य मंत्र हैं, परंतु राम नाम वह मंत्र है जिसमें सभी मंत्रों का सार समाया है। तुलसीदास जी ने भी कहा—
“राम नाम बड़ राम ते…”
अर्थात, राम से भी बढ़कर राम का नाम है, क्योंकि वही नाम हमारे जीवन में सीधे प्रकाश भर देता है। इस अवसर पर बोलते हुए श्री महंत रघुवीर दास महाराज ने कहा
राम नाम सिर्फ जपने की वस्तु नहीं, एक जीवन पद्धति है। यह हमें सिखाता है—धैर्य कैसे रखें,सत्य पर कैसे अडिग रहें,कर्तव्य को कैसे निभाएं,दूसरों के प्रति करुणा कैसे रखें,राम नाम जपते-जपते मनुष्य के विचार बदलते हैं, जीवन में अनुशासन आता है और स्वभाव में विनम्रता का तेज बढ़ जाता है।
ईश्वर तक पहुँचने के कई मार्ग बताए गए हैं, पर यदि कोई सबसे सरल, सहज और फलदायी मार्ग है तो वह है राम नाम का जाप।
न किसी विशेष स्थान की आवश्यकतान कोई विधि-विधान का बोझबस एक सच्चे मन से “राम” कहना ही पर्याप्त है।जब भक्त “राम-राम” कहकर पुकारता है, तो यह पुकार सीधे प्रभु के चरणों तक पहुँचती है।
सदियों से यह आस्था रही है कि संकट के समय राम नाम का स्मरण करने से आसुरी शक्तियाँ दूर होती हैं, भय मिटता है और मनुष्य को मार्ग मिल जाता है।राम नाम:अंधकार में प्रकाश है,निराशा में आशा है,कमजोरी में शक्ति है,जो मन राम नाम में रमा रहे, उसे संसार के दुःख विचलित नहीं कर सकते।भगवान श्रीराम के नाम की महिमा अनंत है—इतनी अनंत कि शब्द भी उसकी सीमा नहीं बाँध सकते। यह नाम प्रेम का, विश्वास का और जीवन के सत्पथ का दीपक है।
बस एक बार “राम” कहकर देखिए
मन हल्का हो जाता है,
हृदय शांत हो जाता है इस अवसर पर कोतवाल धर्मदास सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तगण उपस्थित सभी ने आयोजित विशाल भंडारे में भोजन प्रसाद ग्रहण किया।
