परमार्थ निकेतन पधारे पूर्व जत्थेदार अकाल तख्त साहब सरदार श्री ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी महाराज

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आज का दिन आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रीय एकता, नारी सम्मान और मानवता के उच्चतम मूल्यों का अद्भुत संगम बना। पूर्व जत्थेदार अकाल तख्त साहब सरदार श्री ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी महाराज का पावन आगमन आज परमार्थ निकेतन में हुआ। आज की मासिक श्रीराम कथा से सनातन धर्म और सिख परंपराओं के साझा आध्यात्मिक मूल्यों, सेवा, करुणा और राष्ट्रभक्ति का दिव्य संदेश प्रसारित किया। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी के पावन सान्निध्य, आशीर्वाद और उद्बोधन ने मासिक श्रीराम कथा को आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक जागरूकता से ओतप्रोत कर दिया। इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के संदर्भ में ऐसा संदेश दिया जिसने हर संवेदनशील हृदय को झकझोर दिया। स्वामी जी ने कहा, “अपनी बेटियों को संकोच नहीं, समझ दें; चुप्पी नहीं, चर्चा करें। क्योंकि नारी ही शक्ति है, नारी ही संस्कृति है और नारी ही सृष्टि है।” पूज्य स्वामी जी ने अत्यंत वेदना के साथ कहा कि जिस विषय पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए, उसी को आज भी समाज में शर्म और चुप्पी के पर्दे के पीछे छिपा दिया जाता है। मासिक धर्म कोई अभिशाप नहीं, बल्कि सृष्टि के संचालन की ईश्वर प्रदत्त दिव्य प्रक्रिया है। जिस नारी के गर्भ से संपूर्ण मानवता जन्म लेती है, उसी नारी को उसके स्वाभाविक जैविक चक्र के कारण अपवित्र समझना हमारी सोच की सबसे बड़ी अशुद्धि है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारी बेटियाँ अपने शरीर, स्वास्थ्य और स्वाभिमान को लेकर भय, शर्म और असहजता में जीती रहेंगी, तब तक सशक्त समाज का निर्माण केवल एक सपना रहेगा। स्वस्थ नारी ही सशक्त समाज की आधारशिला है। यदि हमारी बेटियाँ शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ होंगी, तभी राष्ट्र सशक्त, समृद्ध और संस्कारित बनेगा। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज आवश्यकता केवल सैनिटरी उत्पाद बाँटने की नहीं, बल्कि सोच बदलने की है। जब माँ अपनी बेटी से खुलकर बात करेगी, जब पिता अपनी बेटी के स्वास्थ्य को समझेगा, जब विद्यालयों में इस विषय पर शिक्षा और संवेदनशीलता होगी, तभी वास्तविक परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि जिस देश में नारी को देवी माना जाता है, वहाँ उसकी प्राकृतिक प्रक्रिया को कलंक मानना हमारी संस्कृति का नहीं, हमारी अज्ञानता का प्रतीक है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि “देवी स्वच्छ तो देश सशक्त और समृद्ध।” यदि हमारी बेटियाँ संक्रमण, अस्वच्छता और संकोच से पीड़ित रहेंगी, तो समाज कभी पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हो सकता। नारी का स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का विषय है। पूर्व जत्थेदार अकाल तख्त साहब सरदार श्री ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा, अमृत कथा है। पूज्य स्वामी जी के पावन सान्निध्य व मार्गदर्शन में आप सभी को इस दिव्य कथा का श्रवण करने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म में दो ग्रंथ हैं। एक श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी, जिसे नांदेड़ की पावन धरती पर शब्द गुरु का दर्जा प्रदान किया गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी जीवन के हर समय और हर समागम में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। दूसरा दशम ग्रंथ जिसमें श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज द्वारा वर्णित पंक्तियों में कहा गया है कि ’’राम कथा जुग जुग अटल, सभ कोई भाखत नेत, सुरग बास रघुबर करा, सगरी पुरी समेत, जो इह कथा सुनै अरु गावै, दूख पाप तिह निकटि न आवै, बिसन भगति की ए फल होई, आधि व्याधि छवै सके न कोई । इन पंक्तियों में श्रीराम कथा की महिमा का वर्णन है कि श्रीराम की कथा युगों-युगों तक अमर है। जो श्रद्धा से इसका श्रवण और गायन करता है, उसके जीवन से दुःख, पाप, आधि-व्याधि दूर होते हैं और उसे भक्ति तथा आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है। श्रीराम कथा युगों-युगों से चली आ रही हैै, चलती है और चलती रहेगी। गुरुवाणी सुनकर आप स्वयं भी तारते हैं और दूसरों को भी तारते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी ग्रंथ में बेटों को नहीं, बल्कि बेटी को प्राणों से प्यारी कहा गया है। जिस घर में पत्नी अपने पति को देवता और पति अपनी पत्नी को देवी मानता है, वह घर मंदिर बन जाता है। यह हमारे ऊपर है कि हमें अपने घर को नरक बनाना है या स्वर्ग। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि श्रीराम कथा केवल सुनने की कथा नहीं, बल्कि जीवन को यज्ञ बनाने की कथा है। यज्ञ का अर्थ केवल अग्नि में आहुति देना नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, अज्ञान, संकीर्णता और भेदभाव को समर्पित करना है। जब तक हम अपने विचारों को पवित्र नहीं करेंगे, तब तक समाज में वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं। पूर्व जत्थेदार अकाल तख्त साहब सरदार श्री ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी महाराज को श्री अशोक जी ने इलायची की दिव्य माला पहनाकर उनका अभिनन्दन किया। पूज्य स्वामी जी ने सभी का आह्वान करते हुये कहा कि सभी हाथों में हाथ डालकर ऊँचा उठाकर आपस में हाथों को पकड़कर राष्ट्र की एकता बनाये रखने का संकल्प लें। आज परमार्थ निकेतन से एक ऐसा संदेश संपूर्ण विश्व के लिए प्रसारित हुआ जो केवल शब्द नहीं, बल्कि चेतना का आह्वान है कि अपनी बेटियों को चुप्पी नहीं, चर्चा दें; भय नहीं, विश्वास दें; उपेक्षा नहीं, सम्मान दें और राष्ट्र की एकता को बनाये रखें।

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