श्री ललिताम्बा निकेतन आश्रम में आयोजित वार्षिक उत्सव के पावन अवसर पर भक्तिभाव, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। भूपतवाला स्थित श्री ललिताम्बा निकेतन आश्रम में वार्षिक उत्सव पर उमड़ा श्रद्धा का सागर श्रीमद्भागवत कथा अमृत वर्षा एवं विशाल संत समागम में भक्तों ने किया आध्यात्मिक रसपानश्री ललिताम्बा निकेतन आश्रम में आयोजित वार्षिक उत्सव के पावन अवसर पर आज भक्तिभाव, श्रद्धा और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिल। पावन *श्रीमद्भागवत कथा अमृत वर्षा* के रूप में संपन्न इस दिव्य आयोजन प्रातःस्मरणीय गुरु भगवान जगतगुरु रामानंदाचार्य श्री जय रामदास देवाचार्य जी महाराज के पतित-पावन सानिध्य में बड़े ही धूमधाम, हर्षोल्लास एवं वैदिक मंगल ध्वनियों के मध्य संपन्न हुआ।आश्रम परिसर में प्रातःकाल से ही श्रद्धालु भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश के विभिन्न क्षेत्रों सेपधारेसंत-महापुरुषों,धर्माचार्यों एवं श्रद्धालु भक्तजनों की उपस्थिति ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वेद मंत्रों, भजन-कीर्तन और जयघोषों से सम्पूर्ण आश्रम दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। इस अवसर पर आयोजित विशाल संत समागम में संत महापुरुषों के श्रीमुख से निकली ज्ञानगंगा ने उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, वैराग्य एवं मानव कल्याण के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान की। संतों ने अपने दिव्य प्रवचनों में सनातन संस्कृति की महिमा, गुरु-भक्ति, सेवा एवं सत्संग के महत्व का भावपूर्ण वर्णन किया। अपने अमृतमयी आशीर्वचनों में जगतगुरु रामानंदाचार्य श्री जय रामदास देवाचार्य जी महाराज ने कहा कि *“श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ने वाला दिव्य सेतु है। जहाँ भगवत कथा होती है वहाँ स्वयं भगवान का निवास होता है। मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य प्रभु भक्ति, सेवा, करुणा और सत्संग के माध्यम से आत्मकल्याण करना है।”*

उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में मानव को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने के लिए संतों का सानिध्य और भागवत श्रवण अत्यंत आवश्यक है। इस अवसर पर बोलते हुए प्रातः स्मरणीय श्री गुरु राम सेवक उछाली आश्रम के श्री महंत विष्णु दास जी महाराज ने कहा कथा श्रवण से मन की विकृतियाँ दूर होती हैं तथा जीवन में शांति, सद्भाव और दिव्यता का संचार होता है। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालु भक्तजन कथा अमृत वर्षा एवं संतों के दिव्य उपदेशों की ज्ञानसरिता में गोते लगाते हुए भावविभोर दिखाई दिए।समापन अवसर पर आश्रम प्रबंधन द्वारा पधारे संत-महात्माओं एवं श्रद्धालु भक्तों का अभिनंदन किया गया तथा विश्व कल्याण, राष्ट्र उन्नति एवं समस्त मानव समाज की सुख-समृद्धि हेतु विशेष मंगलकामनाएँ व्यक्त की गईं।

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