श्रीमद्भागवत कथा मानव जीवन के कल्याण का दिव्य मार्ग : स्वामी जगदीश दास

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। भूपतवाला स्थित प्रसिद्ध श्री हरिहर पुरुषोत्तम भागवत धाम के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्तदिवसीय ज्ञान यज्ञ कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा के पावन अवसर पर एमएचए मंडलेश्वर प्रातः स्मरणीय स्वामी जगदीश दास जी महाराज ने अपने श्रीमुख से ज्ञान की अमृतवर्षा करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य विग्रह है तथा समस्त वेद, उपनिषद और पुराणों का सार है। उन्होंने कहा कि जिस घर, समाज और राष्ट्र में भागवत कथा का श्रवण होता है वहां सुख, शांति, धर्म और सद्भाव का वास होता है।स्वामी जगदीश दास जी महाराज ने सुंदर दृष्टांत प्रस्तुत करते हुए कहा कि जैसे अंधकार से भरे कक्ष में दीपक जलते ही प्रकाश फैल जाता है, उसी प्रकार मानव जीवन में जब भगवान की कथा प्रवेश करती है तो अज्ञान, मोह और पाप स्वतः दूर हो जाते हैं। उन्होंने ध्रुव, प्रह्लाद, गजेंद्र मोक्ष और सुदामा चरित्र के प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। कथा केवल सुनने का विषय नहीं बल्कि उसे जीवन में धारण करना ही वास्तविक साधना है।उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक सुखों की दौड़ में मानसिक अशांति से घिरता जा रहा है, ऐसे समय में श्रीमद्भागवत कथा ही जीवन को नई दिशा प्रदान करती है। कथा श्रवण से मन पवित्र होता है, बुद्धि निर्मल बनती है और आत्मा को परम शांति प्राप्त होती है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से सनातन संस्कृति, धर्म और संस्कारों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।इस अवसर पर महंत श्री कमल दास जी महाराज ने भी अपने पावन कल्याणकारी वचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि संतों का सान्निध्य और भगवान की कथा मनुष्य के अनेक जन्मों के पुण्यों से प्राप्त होती है। श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मानवता को प्रेम, सेवा, दया और भक्ति का संदेश देने वाला महायज्ञ है। उन्होंने कहा कि जहां भगवान का नाम संकीर्तन होता है वहां समस्त देवताओं का वास होता है और वहां नकारात्मक शक्तियां स्वतः समाप्त हो जाती हैं।महंत श्री कमल दास जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और धर्म से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। कथा के माध्यम से बच्चों और युवाओं में नैतिकता, सदाचार और संस्कारों का संचार होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से भगवान का स्मरण, सत्संग और सेवा करने का आग्रह किया।

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